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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड चौपाई 4

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जनकसुता जग जननि जानकी । अतिसय प्रिय करुनानिधान की ॥ ताके जुग पद कमल मनावउँ । जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ ॥

Janakasuta jaga janani janaki. Atisaya priya karunanidhana ki. Take juga pada kamala manavaun. Jasu krupan niramala mati pavaun.

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

राजा जनककी पुत्री, जगत्की माता और करुणानिधान श्रीरामचन्द्रजीकी प्रियतमा श्रीजानकीजीके दोनों चरणकमलोंको मैं मनाता हूँ, जिनकी कृपासे निर्मल बुद्धि पाऊँ॥ ४॥

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