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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड चौपाई 6

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

निज कबित्त केहि लाग न नीका । सरस होउ अथवा अति फीका ॥ जे पर भनिति सुनत हरषाहीं । ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं ॥

Nija kabitta kehi laga na nika. Sarasa hou athava ati phika. Je para bhaniti sunata harshahin. Te bara purusha bahuta jaga nahin.

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

रसीली हो या अत्यन्त फीकी, अपनी कविता किसे अच्छी नहीं लगती ? किन्तु जो दूसरेकी रचनाको सुनकर हर्षित होते हैं, ऐसे उत्तम पुरुष जगत्में बहुत नहीं हैं,॥ ६॥

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