वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
दो० — बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास । राम नाम बर बरन जुग सावन भादव मास ॥ १९ ॥
Doha — Barsha ritu raghupati bhagati tulasi saali sudaas. Raam naam bar baran jug saavan bhaadav maas.
श्रीरघुनाथजीकी भक्ति वर्षा-ऋतु है, तुलसीदासजी कहते हैं कि उत्तम सेवकगण धान हैं और 'राम' नामके दो सुन्दर अक्षर सावन-भादोंके महीने हैं ॥ १९ ॥
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