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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

आखर मधुर मनोहर दोऊ । बरन बिलोचन जन जिय जोऊ ॥ सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू । लोक लाहु परलोक निबाहू ॥

Aakhar madhur manohar dou. Baran bilochan jan jiya jou. Sumirat sulabh sukhad sab kahu. Lok lahu parlok nibahu.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दोनों अक्षर मधुर और मनोहर हैं, जो वर्णमालारूपी शरीरके नेत्र हैं, भक्तोंके जीवन हैं तथा स्मरण करनेमें सबके लिये सुलभ और सुख देनेवाले हैं, और जो इस लोकमें लाभ और परलोकमें निर्वाह करते हैं (अर्थात् भगवान्‌के दिव्य धाममें दिव्य देहसे सदा भगवत्सेवामें नियुक्त रखते हैं) ॥ १ ॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 1 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik