ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

दोहा 4

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

दो०—उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति । जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति ॥ ४ ॥

Do. - Udasin ari mit hit sunat jarahin khal riti. Jani pani jug jori jan binati karai sapriti. 4

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दुष्टोंकी यह रीति है कि वे उदासीन, शत्रु अथवा मित्र, किसीका भी हित सुनकर जलते हैं। यह जानकर दोनों हाथ जोड़कर यह जन प्रेमपूर्वक उनसे विनय करता है॥ ४ ॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

दुष्टों की यह रीति (स्वभाव) है कि वे किसी का भी भला सुनकर जल भुन जाते हैं, चाहे वह उदासीन हो, शत्रु हो या मित्र हो। इस स्वभाव को जानकर तुलसीदास जी दोनों हाथ जोड़कर प्रेमपूर्वक उनसे विनती कर रहे हैं।

आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 4 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik