वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
दो०—उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति । जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति ॥ ४ ॥
Do. - Udasin ari mit hit sunat jarahin khal riti. Jani pani jug jori jan binati karai sapriti. 4
दुष्टोंकी यह रीति है कि वे उदासीन, शत्रु अथवा मित्र, किसीका भी हित सुनकर जलते हैं। यह जानकर दोनों हाथ जोड़कर यह जन प्रेमपूर्वक उनसे विनय करता है॥ ४ ॥
दुष्टों की यह रीति (स्वभाव) है कि वे किसी का भी भला सुनकर जल भुन जाते हैं, चाहे वह उदासीन हो, शत्रु हो या मित्र हो। इस स्वभाव को जानकर तुलसीदास जी दोनों हाथ जोड़कर प्रेमपूर्वक उनसे विनती कर रहे हैं।
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