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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

दोहा 5

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

दो०—भलो भलाइहि पै लहइ लहइ निचाइहि नीचु। सुधा सराहिअ अमरताँ गरल सराहिअ मीचु॥ ५ ॥

Do. - Bhalo bhalaihi pai lahai lahai nichaihi nichu. Sudha sarahia amaratan garala sarahia michu. 5

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भला भलाई ही ग्रहण करता है और नीच नीचताको ही ग्रहण किये रहता है। अमृतकी सराहना अमर करनेमें होती है और विषकी मारनेमें॥ ५॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 5 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik