वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
दुख सुख पाप पुन्य दिन राती । साधु असाधु सुजाति कुजाती ॥ दानव देव ऊँच अरु नीचू । अमिअ सुजीवनु माहुरु मीचू ॥ माया ब्रह्म जीव जगदीसा । लच्छि अलच्छि रंक अवनीसा ॥ कासी मग सुरसरि क्रमनासा । मरु मारव महिदेव गवासा ॥ सरग नरक अनुराग बिरागा । निगमागम गुन दोष बिभागा ॥
Dukha sukha papa punya dina rati. Sadhu asadhu sujati kujati. Danava deva uncha aru nichu. Amia sujivanu mahuru michu. Maya brahma jiva jagadisa. Lachchhi alachchhi ranka avanisa. Kasi maga surasari kramanasa. Maru marava mahideva gavasa. Saraga naraka anuraga biraga. Nigamagama guna dosha bibhaga.
दुःख-सुख, पाप-पुण्य, दिन-रात, साधु-असाधु, सुजाति-कुजाति, दानव-देवता, ऊँच-नीच, अमृत-विष, सुजीवन (सुन्दर जीवन)-मृत्यु, माया-ब्रह्म, जीव-ईश्वर, सम्पत्ति-दरिद्रता, रंक-राजा, काशी-मगध, गङ्गा-कर्मनाशा, मारवाड़-मालवा, ब्राह्मण-कसाई, स्वर्ग-नरक, अनुराग-वैराग्य, [ये सभी पदार्थ ब्रह्माकी सृष्टिमें हैं।] वेद-शास्त्रोंने उनके गुण-दोषोंका विभाग कर दिया है॥ ३—५॥
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