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तिथि

सप्तमी तिथि — तिथि — विधि, व्रत, पूजन प्रश्नोत्तर(55)

सप्तमी तिथि से जुड़े 55 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

दुर्गा पूजा

दुर्गा पूजा में सप्तमी अष्टमी नवमी का क्या विशेष महत्व है?

सप्तमी: नबपत्रिका, प्राण प्रतिष्ठा, नेत्रोन्मीलन। अष्टमी: संधि पूजा (108 दीपक), कुमारी पूजा = सर्वशक्तिशाली। नवमी: हवन/पूर्णाहुति, कन्या पूजन, वरदान।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध का मुख्य संदेश क्या है?

सप्तमी श्राद्ध पितृ शांति और लौकिक-पारलौकिक कल्याण का मार्ग है।

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लोक

गरीब व्यक्ति सप्तमी श्राद्ध कैसे करे?

धन न हो तो तिल-जल या श्रद्धा से प्रार्थना करके श्राद्ध करें।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध से स्वर्ग और मोक्ष कैसे मिलते हैं?

सप्तमी श्राद्ध स्वर्ग और मोक्ष का फल देने वाला माना गया है।

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सप्तमी श्राद्ध से राज्य कैसे मिलता है?

सूर्य की तिथि होने से सप्तमी श्राद्ध राज्य और नेतृत्व से जुड़ा है।

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सप्तमी श्राद्ध से धन कैसे मिलता है?

पितरों की प्रसन्नता से धन और संपत्ति मिलती है।

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सप्तमी श्राद्ध से संतान कैसे मिलती है?

पितरों की कृपा से उत्तम संतति और वंश वृद्धि होती है।

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सप्तमी श्राद्ध से आयु कैसे मिलती है?

प्रसन्न पितर श्राद्धकर्ता को दीर्घायु देते हैं।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध का फल क्या है?

सप्तमी श्राद्ध आयु, धन, संतान, राज्य, स्वर्ग और मोक्ष देता है।

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लोक

गीता का सातवां अध्याय क्यों पढ़ें?

सप्तमी पर गीता का सातवाँ अध्याय विशेष फलदायी माना गया है।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध में कितने पिण्ड दें?

सप्तमी श्राद्ध में तीन मुख्य पिण्ड दिए जाते हैं।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध कैसे करें?

स्नान, संकल्प, पिण्डदान, तर्पण, पंचबलि और ब्राह्मण भोजन से सप्तमी श्राद्ध करें।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध की विधि क्या है?

सप्तमी श्राद्ध में तर्पण, पिण्डदान, विश्वेदेव स्थापना और ब्राह्मण भोजन होता है।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध का सही मुहूर्त क्या है?

कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल सप्तमी श्राद्ध के सही मुहूर्त हैं।

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लोक

कुतुप मुहूर्त क्या है?

कुतुप मुहूर्त श्राद्ध का श्रेष्ठ अष्टम मुहूर्त है।

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सप्तमी श्राद्ध किस समय करें?

सप्तमी श्राद्ध कुतुप और अपराह्न काल में करें।

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लोक

सप्तमी और चतुर्दशी श्राद्ध में क्या अंतर है?

सप्तमी सामान्य मृत्यु के लिए, चतुर्दशी अकाल मृत्यु के लिए है।

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सामान्य मृत्यु का सप्तमी श्राद्ध कब करें?

सामान्य सप्तमी मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की सप्तमी को करें।

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अकाल मृत्यु का सप्तमी श्राद्ध होता है?

अकाल मृत्यु का श्राद्ध सप्तमी नहीं, चतुर्दशी को होता है।

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सप्तमी श्राद्ध से यश कैसे मिलता है?

सूर्य की तिथि होने से सप्तमी श्राद्ध यश और प्रतिष्ठा देता है।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध से तेज कैसे मिलता है?

सूर्य संबंध के कारण सप्तमी श्राद्ध तेज और ओज देता है।

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सप्तमी, अष्टमी और नवमी क्यों खास हैं?

इन तिथियों में पितृ पूजन पितृकल्याण योग बनाता है।

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लोक

नारद संहिता में सप्तमी का क्या महत्व है?

नारद संहिता सप्तमी को पितृकल्याण योग से जोड़ती है।

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लोक

पितृकल्याण योग क्या है?

सप्तमी, अष्टमी और नवमी का पितृ पूजन पितृकल्याण योग है।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध मातृत्व-पितृत्व से कैसे जुड़ा है?

सप्तमी सूर्य और सप्तमातृकाओं के कारण मातृत्व-पितृत्व दोनों से जुड़ी है।

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सप्तमातृका क्या हैं?

सप्तमातृका सात दिव्य माताएँ हैं।

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सप्तमी श्राद्ध में सूर्य का महत्व क्या है?

सूर्य सप्तमी श्राद्ध को तेज, यश और ऊर्जा से जोड़ते हैं।

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लोक

सूर्य देव सप्तमी से कैसे जुड़े हैं?

सप्तमी सूर्य की तिथि मानी गई है।

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लोक

सप्तमी तिथि के देवता कौन हैं?

सप्तमी तिथि के अधिष्ठाता देव सूर्य माने गए हैं।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध न करने से क्या होता है?

सप्तमी श्राद्ध न करने से पितृ तृप्ति अपूर्ण रह सकती है।

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लोक

कृष्ण सप्तमी मृत्यु पर श्राद्ध कब करें?

कृष्ण सप्तमी मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की सप्तमी को करें।

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लोक

शुक्ल सप्तमी मृत्यु पर श्राद्ध कब करें?

शुक्ल सप्तमी मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की सप्तमी को करें।

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सप्तमी मृत्यु तिथि का नियम क्या है?

सप्तमी मृत्यु तिथि वाले पितर का श्राद्ध पितृ पक्ष की सप्तमी को होता है।

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सप्तमी को किसका श्राद्ध करें?

सप्तमी मृत्यु तिथि वाले पितरों का श्राद्ध करें।

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लोक

सप्तमी तिथि का श्राद्ध क्यों करें?

सप्तमी मृत्यु तिथि वाले पितरों की तृप्ति के लिए यह श्राद्ध करें।

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लोक

पितृ पक्ष की सप्तमी क्यों खास है?

सप्तमी सूर्य और पितृकल्याण योग से जुड़ी विशेष तिथि है।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध किसके लिए होता है?

यह सप्तमी तिथि को दिवंगत पितरों के लिए होता है।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध कब किया जाता है?

सप्तमी श्राद्ध पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि को किया जाता है।

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लोक

सप्तमी श्राद्ध क्या है?

पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि का श्राद्ध सप्तमी श्राद्ध है।

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श्राद्ध फल

षष्ठी और सप्तमी श्राद्ध का फल क्या है?

षष्ठी श्राद्ध का काम्य फल है द्यूत यानी क्रीड़ा या प्रतियोगिता में विजय। सप्तमी श्राद्ध का काम्य फल है कृषि में अभूतपूर्व सफलता। याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 के अनुसार श्लोक में द्यूतं कृषिं च वाणिज्यं स्पष्ट रूप से इन फलों का वर्णन है। आधुनिक संदर्भ में षष्ठी किसी भी प्रतियोगिता में विजय, और सप्तमी कृषि व उत्पादन में सफलता का प्रतीक है।

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व्रत नियम

रथ सप्तमी का व्रत कौन कर सकता है?

यह व्रत कोई भी (औरत, आदमी, बुजुर्ग या बीमार) कर सकता है। औरतों को इससे अखंड सौभाग्य (पति की लंबी उम्र) और आदमियों को सेहत और पैसा मिलता है।

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तिथि और मुहूर्त

स्मार्त और वैष्णव लोगों की रथ सप्तमी की तारीख में अंतर क्यों होता है?

तारीख के नियमों में फर्क के कारण ऐसा होता है। स्मार्त लोग सूरज निकलने के समय की तिथि मानते हैं, जबकि वैष्णव नियम के मुताबिक सप्तमी तिथि सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले शुद्ध रूप से शुरू हो जानी चाहिए।

#स्मार्त#वैष्णव#वेध नियम
दान विधान

रथ सप्तमी के दिन क्या दान करना सबसे शुभ होता है?

इस दिन तांबे के बर्तन में 'तिल' रखकर दान करना सबसे अच्छा माना जाता है। अज्ञानता मिटाने के लिए घी का दीप-दान करना चाहिए। इसके अलावा लाल कपड़े, गुड़ और अन्न का दान करना चाहिए।

#दान#तिल#दीप दान
पूजन विधान

रथ सप्तमी के दिन कौन से मंत्र या पाठ करने चाहिए?

इस दिन सूरज निकलते समय विजय दिलाने वाले 'आदित्य-हृदय स्तोत्र' का पाठ करना चाहिए। साथ ही 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' या 'सूर्य गायत्री मंत्र' का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ होता है।

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लोक परंपरा

तिरुपति बालाजी में रथ सप्तमी पर क्या खास होता है?

तिरुपति बालाजी (तिरुमाला) मंदिर में इसे एक 'मिनी ब्रह्मोत्सव' की तरह मनाया जाता है। भगवान वेंकटेश्वर दिन भर 7 अलग-अलग वाहनों (रथों) पर बैठकर मंदिर के बाहर भक्तों को दर्शन देते हैं।

#तिरुपति#ब्रह्मोत्सव#मलयप्प स्वामी
लोक परंपरा

दक्षिण भारत (कर्नाटक/तमिलनाडु) में रथ सप्तमी कैसे मनाते हैं?

वहां आंगन में सूर्य-रथ की रंगोली बनाकर गाय के गोबर पर मिट्टी के बर्तन में दूध उबाला जाता है। उबलते दूध को शुभ माना जाता है और उसी से 'मीठा पोंगल' (परमान्न) बनाकर सूर्य को भोग लगाते हैं।

#परमान्न#कोलम रंगोली#दक्षिण भारत
आहार नियम

रथ सप्तमी के व्रत में कौन सा खाने का नियम सबसे जरूरी है?

इस व्रत में 'नमक' खाना बिल्कुल मना होता है। इसे 'अलवण व्रत' (बिना नमक का व्रत) कहा जाता है। नमक छोड़ने से शरीर शुद्ध होता है और व्रत का पूरा फल मिलता है।

#अलवण व्रत#नमक निषेध#निराहार
पूजन विधान

रथ सप्तमी के स्नान में किन पत्तों का इस्तेमाल होता है और कैसे?

इस दिन नहाते समय 'आक' या 'मदार' (अर्क) के 7 पत्तों का इस्तेमाल होता है। नहाते समय इन 7 पत्तों को सिर, कंधों, घुटनों और पैरों पर रखकर पाप-नाशक मंत्र के साथ पानी डाला जाता है।

#अर्क-पत्र#स्नान विधि#आक के पत्ते
तिथि और मुहूर्त

रथ सप्तमी की पूजा और स्नान का सबसे शुभ समय क्या है?

इस दिन स्नान और पूजा के लिए 'अरुणोदय काल' सबसे शुभ माना जाता है, जो सुबह सूरज निकलने (सूर्योदय) से लगभग डेढ़ घंटे (1 घंटा 36 मिनट) पहले का समय होता है।

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नाम का कारण

रथ सप्तमी को 'आरोग्य सप्तमी' क्यों कहते हैं?

इस दिन सूर्य की पूजा और अर्क के पत्तों से विशेष स्नान करने से चर्म रोग और सात जन्मों की बीमारियां दूर होती हैं, इसलिए इसे स्वास्थ्य देने वाली 'आरोग्य सप्तमी' कहते हैं।

#आरोग्य सप्तमी#चर्म रोग#बीमारी नाश
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
सभी पर्व देखें

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।

सप्तमी तिथि — सम्बन्धित प्रश्न — 55 प्रश्न