ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
26 नवंबर 2025

26 नवंबर 2025 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

26 नवंबर 2025 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल षष्ठी
नक्षत्र
श्रवण
योग
वृद्धि
करण
कौलव
वार
बुधवार
हिन्दू मास
मार्गशीर्ष
ऋतु
हेमन्त
सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
17:24

26 नवंबर 2025 के लिए प्रश्नोत्तर

बुधवार को कौन से काम शुभ?

बुधवार=बुध(बुद्धि/व्यापार)। सभी कार्य शुभ — व्यापार, दुकान, बैंक, शिक्षा, लेखन, संचार, गृहप्रवेश। कोई विशेष वर्जना नहीं।

गणेश चालीसा पढ़ने की विधि और नियम क्या हैं?

विधि: स्नान → पूर्व/उत्तर मुख → दीपक → सिंदूर, दूर्वा, मोदक → 'ॐ गं गणपतये नमः' 3 बार → चालीसा → आरती। बुधवार/चतुर्थी विशेष। तुलसी वर्जित। 21/40 दिन निरंतर = विशेष फल। फल: विघ्न नाश, बुद्धि, सफलता।

बुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?

बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।

अष्टका श्राद्ध किन महीनों में होता है?

मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन में।

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था कैसे काम करती है?

यमलोक की गुप्तचर व्यवस्था श्रवण-श्रवणी देवों से चलती है, जो हर गुप्त कर्म देखकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

अविवाहित कन्याएँ माँ कात्यायनी की पूजा क्यों करती हैं?

अविवाहित कन्याएँ पूजा क्यों: गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी की पूजा की थी। आज भी: मार्गशीर्ष माह में कात्यायनी व्रत = मनचाहे जीवनसाथी के लिए। सच्चे मन से पुकारने वाली कन्या को योग्य जीवनसाथी का वरदान।

शिव वास भोजन में होने पर क्या होता है?

शिव वास भोजन में होने पर (षष्ठी, त्रयोदशी) शिव का ध्यान अन्यत्र होता है जिससे सकाम कर्म का फल प्राप्ति कठिन होती है — इन तिथियों को त्याज्य माना गया है।

प्रेतकल्प का श्रवण किसे नहीं करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण किसी के लिए भी पूर्णतः वर्जित नहीं। 'घर में न रखने' की धारणा भ्रामक है। परंपरागत सावधानी — गर्भवती, अबोध बच्चे और अत्यंत संवेदनशील व्यक्तियों को विस्तृत यातना-वर्णन से दूर रखा जा सकता है।

प्रेतकल्प का श्रवण किस उद्देश्य से किया जाता है?

प्रेतकल्प श्रवण के उद्देश्य — मृत आत्मा की सद्गति, परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान, मृत्यु की सच्चाई समझना, पाप-मोचन और वैराग्य-आत्मज्ञान की प्राप्ति।

प्रेतकल्प का श्रवण क्यों करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण करना चाहिए — पापों से मुक्ति, मृत आत्मा को सद्गति, विष्णु-प्रदत्त ज्ञान की प्राप्ति, प्रेतत्व से बचाव और परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान के लिए।

भगवान हमारी प्रार्थना कैसे सुनते हैं

भगवान अंतर्यामी हैं — हर हृदय में निवास करते हैं। प्रार्थना सीधे उन तक पहुँचती है। उनका उत्तर मन में शांति, स्पष्ट विचार, परिस्थिति में बदलाव या गुरु-संत के माध्यम से आता है।

नवधा भक्ति में कौन सी भक्ति सबसे सरल है

प्रह्लाद के अनुसार श्रवण सर्वश्रेष्ठ है। कलियुग के लिए नाम-संकीर्तन सबसे सुलभ है — देश-काल का कोई बंधन नहीं। जो स्वभाव से सहज लगे वही सबसे सरल भक्ति है।

श्रवण कीर्तन स्मरण पादसेवन अर्चन वंदन दास्य सख्य आत्मनिवेदन

नवधा भक्ति के नौ अंग — श्रवण (कथा सुनना), कीर्तन (गान), स्मरण (स्मरण), पादसेवन (चरण-सेवा), अर्चन (पूजा), वंदन (नमस्कार), दास्य (सेवक-भाव), सख्य (मित्र-भाव), आत्मनिवेदन (पूर्ण समर्पण)। एक भी पूर्ण हो तो मोक्ष मिले।

बुध मजबूत करने बुधवार उपाय

बुधवार: गणेश+'ॐ बुं बुधाय नमः' 108+हरा+मूंग दान+पन्ना+अथर्वशीर्ष+पुस्तक दान+बुद्धि कार्य।

बुधवार को कौन सा रंग पहनें

बुधवार = हरा (बुध ग्रह)। बुद्धि, व्यापार, संचार लाभ। गणेश/विष्णु पूजा। पन्ना रत्न। ज्योतिष परंपरा।

गर्भावस्था में कौन से मंत्र सुनने चाहिए

गायत्री मंत्र (बुद्धि), विष्णु सहस्रनाम, गीता, सुंदरकांड, संतान गोपाल, महामृत्युंजय। शास्त्र: अभिमन्यु + प्रह्लाद = गर्भ में सीखा। विज्ञान: prenatal music therapy लाभकारी।

उपनिषद में आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करें?

उपनिषदों में आत्मज्ञान की विधि है — मुमुक्षुत्व → सद्गुरु → श्रवण → मनन → निदिध्यासन → 'नेति नेति' विचार → अपरोक्षानुभूति। बृहदारण्यक (4/4/22) — 'आत्मा श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यः।' कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती।

उपनिषद में साधना का महत्व क्या है?

उपनिषदों में साधना का मूल मार्ग है — श्रवण → मनन → निदिध्यासन (बृहदारण्यक 4/4/22)। साधन-चतुष्टय — विवेक, वैराग्य, षट्सम्पत्ति और मुमुक्षुत्व — वेदांत साधना के चार अनिवार्य अंग हैं। छान्दोग्य (7/26) — आहार-शुद्धि से मन-शुद्धि और मन-शुद्धि से ब्रह्म-साक्षात्कार।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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