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28 अक्टूबर 2026

28 अक्टूबर 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

28 अक्टूबर 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण तृतीया
नक्षत्र
कृत्तिका
योग
व्यतीपात
करण
वणिज
वार
बुधवार
हिन्दू मास
कार्तिक
ऋतु
शरद
सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
17:39

28 अक्टूबर 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

बुधवार को कौन से काम शुभ?

बुधवार=बुध(बुद्धि/व्यापार)। सभी कार्य शुभ — व्यापार, दुकान, बैंक, शिक्षा, लेखन, संचार, गृहप्रवेश। कोई विशेष वर्जना नहीं।

गणेश चालीसा पढ़ने की विधि और नियम क्या हैं?

विधि: स्नान → पूर्व/उत्तर मुख → दीपक → सिंदूर, दूर्वा, मोदक → 'ॐ गं गणपतये नमः' 3 बार → चालीसा → आरती। बुधवार/चतुर्थी विशेष। तुलसी वर्जित। 21/40 दिन निरंतर = विशेष फल। फल: विघ्न नाश, बुद्धि, सफलता।

बुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?

बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।

मंदिर में तुलसी विवाह के दिन विशेष सजावट क्यों करते हैं?

तुलसी+शालिग्राम विवाह (कार्तिक एकादशी)। विष्णु जागे (देवउठनी), मंगल कार्य आरंभ, तुलसी=लक्ष्मी, विवाह=सजावट। मंडप/फूल/गन्ना। कराना=पुत्री विवाह समान पुण्य।

युगादि तिथि क्या होती है?

जिस तिथि को युगारंभ से जोड़ा जाए, वह युगादि तिथि कही जाती है।

तृतीया श्राद्ध वरार्थिनी क्यों है?

तृतीया तिथि वरदान देने वाली मानी गई है, इसलिए वरार्थिनी है।

मार्कण्डेय पुराण में तृतीया श्राद्ध क्या है?

मार्कण्डेय पुराण तृतीया को वरदान देने वाली तिथि कहता है।

भगवान स्कंद (कार्तिकेय) का जन्म कैसे हुआ?

कार्तिकेय जन्म: सामान्य तरीके से नहीं। भगवान शिव के तेज से → अग्निदेव और गंगाजी के माध्यम से → छह कृत्तिका नक्षत्रों (स्त्रियों) ने धारण किया → पार्वती ने छह बच्चों को एकाकार करके स्कंद को गोद में लिया।

भगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?

शिव-पार्वती के मिलन का तेज → अग्नि ने धारण किया → गंगा में प्रवाहित → शरवण वन में 6 बालक → कृत्तिका कन्याओं ने पालन किया → पार्वती के आलिंगन से 6 बालक मिलकर षडानन (कार्तिकेय) बने → तारकासुर वध।

बुध मजबूत करने बुधवार उपाय

बुधवार: गणेश+'ॐ बुं बुधाय नमः' 108+हरा+मूंग दान+पन्ना+अथर्वशीर्ष+पुस्तक दान+बुद्धि कार्य।

बुधवार को कौन सा रंग पहनें

बुधवार = हरा (बुध ग्रह)। बुद्धि, व्यापार, संचार लाभ। गणेश/विष्णु पूजा। पन्ना रत्न। ज्योतिष परंपरा।

भैया दूज पर बहन तिलक कैसे लगाए

भैया दूज तिलक: बहन स्नान → चौकी पर लाल कपड़ा → भाई बिठाएँ → अनामिका से रोली तिलक (भ्रूमध्य) + अक्षत → आरती → मिठाई → दक्षिणा। कथा: यमुना ने यमराज को तिलक → अकाल मृत्यु भय नाश।

भैया दूज पर यमराज की पूजा क्यों करते हैं?

भैया दूज यमराज: यम-यमुना कथा (बहन ने भोजन कराया→यम ने वर='अकाल मृत्यु नहीं'), यम=मृत्यु देवता (भाई रक्षा), यमुना स्नान=यम भय मुक्ति। बहन→तिलक→भोजन→दक्षिणा। रक्षाबंधन पूरक।

तुलसी विवाह प्रबोधिनी एकादशी पर कैसे करें

तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल)। तुलसी = कन्या (साड़ी, श्रृंगार), शालग्राम = वर। विवाह: गणपति पूजन → कन्यादान → गठबन्धन → 7 फेरे (दीपक चारों ओर) → आरती। गन्ना-आँवला अर्पित। इससे विवाह मौसम आरम्भ। कन्यादान पुण्य।

गोवर्धन पूजा कैसे करें

गोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।

भैया दूज पर पूजा कैसे करें

भैया दूज: कार्तिक शुक्ल द्वितीया। बहन भाई को तिलक (रोली-चावल) → आरती → मिठाई/फल → भोजन खिलाए। भाई उपहार दे। कथा: यमुना ने यमराज का तिलक किया — वरदान: तिलक करवाने वाले को यमभय नहीं। भाई-बहन स्नेह बन्धन।

कार्तिक मास में स्नान और दीपदान का क्या विधान है

कार्तिक = सबसे पवित्र मास (पद्मपुराण)। स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में नदी/घर पर, सर्वपापनाशक। दीपदान: सन्ध्याकाल में तुलसी/पीपल/मन्दिर/नदी तट पर — घी/तिल तेल के मिट्टी दीये। तुलसी पूजा नित्य। कार्तिक पूर्णिमा = देव दीपावली। दान का विशेष पुण्य।

तुलसी विवाह की विधि और मंत्र क्या हैं?

तुलसी विवाह मंत्र: गणेश पूजन (ॐ गं गणपतये नमः) → तुलसी पूजन (ॐ तुलस्यै नमः + महाप्रसाद जननी...) → शालिग्राम (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) → कन्यादान मंत्र → सात फेरे → मौली बन्धन → आरती → भोग। शालिग्राम पर चावल नहीं, तिल चढ़ाएँ।

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पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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