पर्वअन्नकूट उत्सव में गोवर्धन पर्वत बनाने की विधि क्या हैगोवर्धन विधि: गाय गोबर से लेटे पुरुष (गिरिराज) बनाएँ → नाभि पर कटोरा (दूध/दही) → फूल-तुलसी सजाएँ → पूजा → 56 भोग (छप्पन) अर्पण → 7 परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने इन्द्र के बजाय गोवर्धन पूजा कराई।#अन्नकूट#गोवर्धन#गोबर
पर्वगोवर्धन पूजा कैसे करेंगोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।#गोवर्धन#अन्नकूट#कृष्ण
पर्वअन्नकूट पूजा की विधि क्या हैअन्नकूट: 56 (छप्पन) प्रकार के व्यंजन = अन्न का पर्वत। कृष्ण/गोवर्धन को अर्पित → भोग → प्रसाद वितरण। 56 = 7 दिन × 8 प्रहर (गोवर्धन उठाने की अवधि)। श्रीनाथजी, जगन्नाथ, वृन्दावन मन्दिरों में भव्य। यथाशक्ति व्यंजन बनाएँ।#अन्नकूट#छप्पन भोग#गोवर्धन
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर कृष्ण जन्म की पूजा कैसे करें?जन्माष्टमी: निर्जला व्रत → झूला सजाएँ → मध्यरात्रि 12 बजे बालकृष्ण पंचामृत अभिषेक → वस्त्र-मुकुट-मोरपंख → माखन-मिश्री भोग → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कृष्ण जन्म कथा → आरती → झूला → प्रसाद से व्रत पारण।#जन्माष्टमी#कृष्ण जन्म#भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
हवन विधिसंतान गोपाल हवन कैसे करवाएं?संतान गोपाल हवन: पति-पत्नी साथ → गणेश पूजन → 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द...' 1,25,000 जप → पीपल समिधा-दूध-खीर हवन → दशांश आहुति → पूर्णाहुति → गोदान। पुत्रदा एकादशी व्रत। चिकित्सा+आध्यात्मिक दोनों।#संतान गोपाल#संतान प्राप्ति#गोपाल हवन
गीता अध्ययनभगवद गीता का पाठ कैसे करें?गीता का पाठ प्रातःकाल स्नान के पश्चात, शांत मन से, श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। पहले महात्म्य पढ़ें, फिर श्लोकों का अर्थ समझते हुए क्रमशः अध्याय 1 से 18 तक पाठ करें और ज्ञान को जीवन में उतारें।#गीता पाठ#विधि#नियम
मंत्र एवं साधनागोपाल मंत्र की सिद्धि कैसे होती है?गोपाल मंत्र की सिद्धि के लिए एक लाख जप पूर्ण करने का विधान है। स्फटिक या रुद्राक्ष माला से ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार और एकाग्रता के साथ जप करें। जप पूर्ण होने पर दशांश हवन और ब्राह्मण भोजन का विधान है।#गोपाल मंत्र#संतान गोपाल#मंत्र सिद्धि
पूजा विधानराधा कृष्ण युगल पूजा कैसे करें?राधाजी को श्रीकृष्ण की बाईं ओर स्थापित करें। पंचामृत स्नान, मिलते-जुलते वस्त्र, गुलाब-तुलसी, माखन-मिश्री-पेड़े का भोग। 'ॐ राधा-कृष्णाभ्यां नमः' या 'राधे कृष्णा' जप करें। एकादशी और राधाष्टमी पर विशेष पूजा करें।#राधा कृष्ण#युगल पूजा#निम्बार्क
पूजा विधानलड्डू गोपाल पूजा का विशेष विधान क्या है?लड्डू गोपाल को बालक मानकर सेवा करें। प्रातः पंचामृत स्नान, मौसमी वस्त्र, मोरपंख मुकुट, बाँसुरी, माखन-मिश्री-तुलसी का भोग, दिन में दो बार भोग, रात्रि में शयन सेवा। तुलसी अनिवार्य है।#लड्डू गोपाल#बाल कृष्ण#पूजा विधि
अस्त्र शस्त्रनारायणास्त्र से कैसे बचते हैं?नारायणास्त्र से बचने के लिए सभी शस्त्र त्यागकर, मन से युद्ध-विचार छोड़कर, हाथ जोड़कर आत्मसमर्पण करें। यह अस्त्र केवल प्रतिरोध करने वाले पर वार करता है।#नारायणास्त्र से बचाव#आत्मसमर्पण#निहत्था