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ग्रन्थ

स्कंद पुराण(64)

स्कंद पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 64 प्रश्न उपलब्ध हैं।

काशी के शिवलिंग

काशी में महोदरेश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की और इसका प्रामाणिक उल्लेख किस पुराण में है?

इसकी स्थापना भगवान शिव के परम गण 'महोदर' ने की थी। इसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खण्ड (अध्याय ५३-५४) में प्राप्त होता है।

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उपासना का फल

दारा नगर, काशी स्थित सिद्ध महाकालेश्वर शिवलिंग की उपासना और धन्वंतरि कूप के जल का क्या फल प्राप्त होता है?

उपासना से अकाल मृत्यु से रक्षा, संपूर्ण विश्व की पूजा का फल और मनोकामनाओं की त्वरित पूर्ति होती है। धन्वंतरि कूप का जल सभी व्याधियों का समूल नाश करता है, तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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मंत्र और स्तोत्र

महाकालेश्वर शिवलिंग के पूजन, अभिषेक और ध्यान के लिए किन वैदिक और तांत्रिक मंत्रों का प्रयोग करना चाहिए?

पूजा के लिए स्कंद पुराण का 'ॐ हूँ विश्वमूर्तये नमः', अकाल मृत्यु भय नाशक महाकालेश्वर गायत्री (ॐ महाकालेश्वराय विद्महे...), अघोर ध्यान मंत्र और शुद्धि के लिए आत्मतत्त्व शोधन मंत्र का प्रयोग करना शास्त्रसम्मत है।

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काशी के शिवलिंग

काशी में महाकालेश्वर शिवलिंग कहाँ स्थित है और इसकी स्थापना किसने की?

यह काशी के दारा नगर में महामृत्युंजय महादेव मंदिर प्रांगण में स्थित है। इसकी स्थापना शिव के परम गण 'महाकाल' ने की थी, जिसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड में है।

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काशी के शिवलिंग

काशी खंड अध्याय 69 में शंकुकर्णेश्वर का क्या स्थान है — 68 मोक्षदायी शिवलिंग

काशी खंड अध्याय 69 में 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में शंकुकर्णेश्वर 'महातेज लिंग' के रूप में वर्णित हैं। कुरुक्षेत्र का स्थाणु, नैमिषारण्य का देवदेव लिंग भी इनमें हैं। श्लोक 173 — इनके नाम सुनने मात्र से हजारों जन्मों के पाप नष्ट।

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काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव कौन हैं और इनकी स्थापना किसने की?

शंकुकर्णेश्वर महादेव काशी का गुप्त शिवलिंग है, जिसे शिवगण 'शंकुकर्ण' ने स्थापित किया। काशी खंड अध्याय 69 में इसे काशी के 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में गिना गया है।

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काशी के शिवलिंग

काशी में कुल कितने शिवलिंग हैं और कौन-कौन ने स्थापित किए?

काशी में ५११+ शिवलिंग — १२ स्वयंभू, ४६ देवताओं द्वारा, ४७ ऋषियों द्वारा, ४० शिवगणों द्वारा, २९४ शिवभक्तों द्वारा स्थापित। काशी तांत्रिक दृष्टि से एक 'महा-यंत्र' है। वर्तमान में ~३२४ शिवलिंग अस्तित्व में।

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काशी के तीर्थ

घंटाकर्ण हृद में स्नान और दर्शन की फलश्रुति — स्कंद पुराण

तीन फलश्रुतियाँ — (१) जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति, (२) कहीं भी मरने पर काशी-मरण का पुण्य, (३) सात पीढ़ियों के नरकवासी पितरों का उद्धार। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई इस तीर्थ से तिलांजलि अर्पित करे।

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पौराणिक कथाएँ

राजा दिवोदास के कारण शिव ने काशी क्यों छोड़ी थी?

दिवोदास के राजकाल में शिव मंदराचल गए। काशी की स्थिति जानने को योगिनियाँ, सूर्य, ब्रह्मा भेजे — सब काशी की माया में मुग्ध होकर लौटे नहीं। फिर घंटाकर्ण-महोदर को भेजा — वे भी मोहित होकर रुक गए और शिवलिंग स्थापित कर दिए।

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काशी के तीर्थ

घंटाकर्ण हृद (कर्णघंटा तालाब) क्या है और इसमें स्नान का क्या फल है?

घंटाकर्ण हृद शिवगण घंटाकर्ण द्वारा स्वयं खोदा गया पवित्र कुंड है (K 60/67)। स्कंद पुराण कहता है — इसमें स्नान कर एकाग्र होने पर विश्वनाथ की आरती के घंटों का दिव्य नाद सुनाई देता है।

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काशी के शिवलिंग

काशी में शिवगणों द्वारा स्थापित शिवलिंगों की सूची

काशी खंड के अनुसार — दंडपाणि ने दंडीश्वर, घंटाकर्ण ने घंटाकर्णेश्वर, वीरभद्र ने वीरभद्रेश्वर, कुण्डोदर ने कुण्डोदरेश्वर, महाकाल ने महाकालेश्वर, क्षेमक ने क्षेमेश्वर, पंचशीर्ष ने पंचशिखेश्वर की स्थापना की।

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पुराण ज्ञान

स्कंद पुराण सबसे बड़ा पुराण क्यों है?

स्कन्द पुराण में ८१,१०० श्लोक हैं — किसी अन्य पुराण से अधिक, इसीलिए यह सबसे बड़ा है। इसमें ६ खण्ड हैं। काशी, जगन्नाथ, महाकाल, रामेश्वर जैसे तीर्थों की महिमा, नदियों की उद्गम-कथाएँ, सत्यनारायण व्रत और शिवरात्रि का वर्णन है।

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स्तोत्र परिचय

लक्ष्मी सहस्त्रनाम क्या है?

लक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्र में देवी के 1000 नाम हैं — स्कंद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में यह मिलता है। प्रमुख नाम हैं — श्री, रमा, पद्मा, इंदिरा, वसुंधरा, महालक्ष्मी, भुवनेश्वरी, मोक्षदायिनी। शुक्रवार को इसका पाठ लक्ष्मी को स्थायी करता है।

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कार्तिकेय कथा

कार्तिकेय को स्कंद क्यों कहते हैं?

कार्तिकेय को 'स्कंद' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका जन्म शिव-तेज के गंगाजल में स्खलित होने से शरवण वन में हुआ। 'स्कंद' का अर्थ है स्खलित होकर प्रकट होने वाला। शत्रु-सेना को छिन्न करने वाले योद्धा के अर्थ में भी यह नाम सार्थक है।

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