ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
ग्रन्थ

स्कंद पुराण(64)

स्कंद पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 64 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

स्कंद पुराण में कार्तिकेय के अस्त्रों का क्या वर्णन है

स्कंद पुराण में कार्तिकेय का मुख्य अस्त्र वेल (माता-प्रदत्त भाला) है। जन्म से ही उनके हाथ में दिव्य शस्त्र थे। वेल से तारकासुर-वध और सुरपदम का पहाड़-रूप तोड़ा। वे देव-सेनापति हैं।

#स्कंद पुराण#कार्तिकेय अस्त्र#वेल
लोक

जालंधर की कहानी किस पुराण में आती है?

जालंधर की कथा प्रमुख रूप से शिव पुराण में आती है।

#जालंधर पुराण#शिव पुराण#स्कंद पुराण
लोक

स्कन्द पुराण में एकादशी श्राद्ध फल क्या है?

धन, धान्य, राजकृपा और कामना पूर्ति।

#स्कन्द पुराण#धन धान्य#राजकृपा
लोक

एकादशी श्राद्ध से राजकृपा मिलती है क्या?

हाँ, राजकृपा का फल बताया गया है।

#राजकृपा#स्कन्द पुराण#एकादशी श्राद्ध
लोक

एकादशी श्राद्ध से धन धान्य मिलता है क्या?

हाँ, धन-धान्य का फल बताया गया है।

#धन धान्य#स्कन्द पुराण#श्राद्ध फल
लोक

शस्त्र मृत्यु का श्राद्ध कब करें?

शस्त्र मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी को करें।

#शस्त्र मृत्यु#चतुर्दशी श्राद्ध#स्कंद पुराण
पुराण माहात्म्य

क्या भगवान शम्भु द्वितीया न करने पर कुपित होते हैं?

हाँ, भगवान शम्भु यानी शिव द्वितीया श्राद्ध न करने पर कुपित होते हैं। स्कन्द पुराण के नागर खण्ड में स्पष्ट है कि जो मनुष्य द्वितीया पर अधिकार होने पर भी महालय श्राद्ध नहीं करता, कुपित शम्भु उसके ब्रह्म-वर्चस्व का सर्वथा नाश कर देते हैं और मृत्यु के बाद रौरव-कालसूत्र नरक प्रदान करते हैं। शम्भु यानी सुख देने वाले, कुपित होकर दुःख भी देते हैं।

#शम्भु क्रोध#शिव कुपित#द्वितीया उल्लंघन
पुराण माहात्म्य

ब्रह्म-वर्चस्व क्या है?

ब्रह्म-वर्चस्व वह दिव्य आत्मिक तेज है जो व्यक्ति को जीवन में सफलता, स्वास्थ्य, यश, और पुण्य देता है। ब्रह्म का अर्थ है परम और वर्चस् का अर्थ है तेज। यह अदृश्य परंतु शक्तिशाली आत्मिक ऊर्जा है। स्कन्द पुराण के अनुसार जो व्यक्ति द्वितीया श्राद्ध नहीं करता, भगवान शिव उसके ब्रह्म-वर्चस्व यानी तेज और पुण्य का सर्वथा नाश कर देते हैं।

#ब्रह्म वर्चस्व#आत्मिक तेज#पुण्य शक्ति
पुराण माहात्म्य

द्वितीया श्राद्ध न करने से क्या होता है?

द्वितीया श्राद्ध न करने पर तीन दुष्परिणाम होते हैं। पहला, भगवान शम्भु यानी शिव कुपित होते हैं। दूसरा, उस व्यक्ति के ब्रह्म-वर्चस्व यानी तेज और पुण्य का सर्वथा नाश हो जाता है। तीसरा, मृत्यु के बाद रौरव और कालसूत्र नामक भयंकर नरकों की यातना भोगनी पड़ती है। स्कन्द पुराण नागर खण्ड अध्याय 230 में यह स्पष्ट वर्णन है।

#श्राद्ध न करना#ब्रह्म वर्चस्व नाश#रौरव नरक
पुराण माहात्म्य

विपुल सम्पदा क्या होती है?

विपुल सम्पदा का अर्थ है प्रचुर और असीमित समृद्धि। विपुल का अर्थ है असीमित, और सम्पदा का अर्थ है ऐश्वर्य। स्कन्द पुराण के नागर खण्ड के अनुसार द्वितीया श्राद्ध से प्रसन्न होकर भगवान महेश्वर यानी शिव इस लोक में विपुल सम्पदा प्रदान करते हैं। इसमें भौतिक धन, परिवारिक सुख, स्वास्थ्य, यश, और विद्या - जीवन के हर पहलू में समृद्धि शामिल है।

#विपुल सम्पदा#अपार समृद्धि#स्कन्द पुराण फल
पुराण माहात्म्य

द्वितीया श्राद्ध से कौन सा लोक मिलता है?

द्वितीया श्राद्ध से कैलास धाम की प्राप्ति होती है। स्कन्द पुराण के नागर खण्ड के अनुसार जो मनुष्य महालय की द्वितीया को भक्ति से श्राद्ध करता है, वह मृत्यु के बाद कैलास धाम प्राप्त करता है और भगवान शिव के गणों के साथ आनन्द पाता है। इस लोक में भी भगवान महेश्वर विपुल सम्पदा प्रदान करते हैं। यह द्वितीया श्राद्ध का सर्वोच्च पारलौकिक फल है।

#कैलास प्राप्ति#द्वितीया फल#परलोक
पुराण माहात्म्य

स्कन्द पुराण के नागर खण्ड में द्वितीया की क्या महिमा है?

स्कन्द पुराण के नागर खण्ड अध्याय 230 में महर्षि व्यास ने महालय की द्वितीया श्राद्ध की महिमा गाई है। जो मनुष्य द्वितीया को पूर्ण भक्ति से श्राद्ध करता है, उससे भगवान भवानीपति महेश्वर यानी शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। वह श्राद्धकर्ता मृत्यु के बाद कैलास धाम प्राप्त करता है और शिव गणों के साथ आनन्द पाता है। इस लोक में भी विपुल सम्पदा मिलती है।

#स्कन्द पुराण#नागर खण्ड#द्वितीया महिमा
श्राद्ध दर्शन

पृथ्वी पर अर्पित अन्न पितरों को कैसे मिलता है?

मत्स्य/स्कंद पुराण: पितर की योनि के अनुसार अन्न रूपांतरित होता है — देव योनि = अमृत, असुर योनि = भोग, पशु योनि = तृण (घास), सर्प योनि = वायु। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से यह सूक्ष्म रूपांतरण होता है।

#पारलौकिक विज्ञान#मत्स्य पुराण#स्कंद पुराण
लोक

हाटकेश्वर शिवलिंग के नीचे क्या बताया गया है?

हाटकेश्वर शिवलिंग और पाताल के नीचे अथाह जलराशि और उसके नीचे पचपन करोड़ घोर नरक बताए गए हैं।

#हाटकेश्वर शिवलिंग नीचे#नरक#पाताल
लोक

हाटकेश्वर शिवलिंग कितना बड़ा है?

हाटकेश्वर शिवलिंग की ऊँचाई एक हजार योजन बताई गई है।

#हाटकेश्वर शिवलिंग आकार#एक हजार योजन#स्कन्द पुराण
लोक

हाटकेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया?

हाटकेश्वर शिवलिंग को ब्रह्मांड के कल्याण के लिए स्वयं भगवान ब्रह्मा ने पाताल में स्थापित किया।

#हाटकेश्वर शिवलिंग#ब्रह्मा#स्कन्द पुराण
लोक

हाटकेश्वर शिवलिंग क्या है?

हाटकेश्वर शिवलिंग पाताल में ब्रह्मा द्वारा स्थापित भगवान शिव का विशाल दिव्य लिंग है।

#हाटकेश्वर शिवलिंग#स्कन्द पुराण#वितल लोक
लोक

स्कंद पुराण में वैराज देवगणों की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?

स्कंद पुराण में वैराज देवगण तृष्णा-मुक्त, निवृत्ति मार्गी, वासुदेव-समर्पित और ब्रह्म-ध्यान में लीन बताए गए हैं।

#स्कंद पुराण#वैराज#तृष्णा
दान विधान

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार क्या दान करें?

राशि अनुसार दान: मेष = ऊनी वस्त्र; वृषभ = गाय-चावल; मिथुन = हरे मूंग; कर्क = घी-चांदी; सिंह = स्वर्ण-गेहूं; कन्या = अन्न-बीज; तुला/वृश्चिक = वस्त्र; धनु = चने की दाल; मकर = तिल-कंबल-ईंधन; कुम्भ = जल-घड़े; मीन = पुष्प-मिष्ठान।

#राशि अनुसार दान#भविष्य पुराण#स्कंद पुराण
तुलसी विवाह परिचय

तुलसी और शालिग्राम का विवाह क्यों होता है — क्या कथा है?

पद्म पुराण और स्कंद पुराण: जलंधर असुर की पत्नी वृंदा के पातिव्रत्य के कारण वह अजेय था। विष्णु ने छल से जलंधर का रूप लिया → वृंदा का पातिव्रत्य भंग → जलंधर का वध संभव। वृंदा ने विष्णु को 'शालिग्राम' बनने का श्राप दिया → विष्णु ने वृंदा को 'तुलसी' बनने का वरदान दिया।

#तुलसी शालिग्राम कथा#वृंदा जलंधर#पद्म पुराण
नवरात्रि और उपासना

स्कंद पुराण के अनुसार विभिन्न आयु की कन्याएं किस देवी का स्वरूप हैं?

स्कंद पुराण: 2 वर्ष = कुमारिका (दुख नाश); 3 = त्रिमूर्ति (धर्म-अर्थ-काम); 4 = कल्याणी (सुख-शांति); 5 = रोहिणी (स्वास्थ्य); 6 = कालिका (शत्रु नाश); 7 = चंडिका (ऐश्वर्य); 8 = शाम्भवी (विजय-लोकप्रियता); 9 = दुर्गा (संकट निवारण); 10 = भद्रा/सुभद्रा (मनोकामना पूर्ति)।

#कन्या आयु देवी#स्कंद पुराण#2 से 10 वर्ष
दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति

स्कंद पुराण के अनुसार 'दुर्गा' नाम कैसे पड़ा?

स्कंद पुराण (काशी खंड, 71वाँ अध्याय): दुर्गमासुर ने वेद चुराए → देवताओं की शक्ति क्षीण → आद्याशक्ति का आह्वान → देवी पार्वती ने महाभयंकर रूप धारण कर दुर्गमासुर का वध किया → देवताओं-ऋषियों ने घोषणा: यह रौद्र रूप 'दुर्गा' कहलाएगा।

#दुर्गमासुर#स्कंद पुराण#नामकरण
हरतालिका तीज और उपासना

हरतालिका तीज व्रत क्या है?

हरतालिका तीज = भाद्रपद शुक्ल तृतीया, निर्जला व्रत। कथा: हिमालय ने विष्णु से विवाह तय किया → पार्वती दुखी → सखी ने हरण कर जंगल ले गई → पार्वती ने बालू का शिवलिंग बनाकर रात भर जागरण किया → शिव प्रकट हुए और पत्नी स्वीकार किया।

#हरतालिका तीज#भाद्रपद#निर्जला व्रत
स्कंद पुराण: वाडवाग्नि कथा

सरस्वती ने वाडवाग्नि से विश्व की रक्षा कैसे की?

शिव परामर्श: केवल सरस्वती ही इसे धारण कर सकती हैं। ब्रह्मा की आज्ञा से सरस्वती ने कुंवारी कन्या का रूप लिया, स्वर्ण पात्र में अग्नि रखी, नदी रूप में प्रकट हुईं और पश्चिम बहते हुए पुष्कर से होते हुए महासागर में अग्नि विसर्जित कर दी।

#वाडवाग्नि रक्षा#नदी रूप#महासागर
स्कंद पुराण: वाडवाग्नि कथा

वाडवाग्नि क्या है?

वाडवाग्नि = भृगुवंशियों और हैहय वंशियों के भयंकर युद्ध और महर्षि और्व के प्रचंड क्रोध से उत्पन्न सर्वनाशी अग्नि। घोड़े के मुख के समान, ब्रह्मांड को भस्म करने की क्षमता। अभी भी समुद्र में लघु रूप में विद्यमान।

#वाडवाग्नि#बड़वाग्नि#प्रलयंकारी अग्नि
गुरु तत्व और गुरु कृपा

गुरु गीता में गुरु के बारे में क्या कहा गया है?

गुरु गीता (स्कंद पुराण): 'गुरुर्ब्रह्मागुरुर्विष्णुःगुरुर्देवोमहेश्वरः। गुरुःसाक्षात्परब्रह्म...' — गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश और साक्षात परब्रह्म हैं।

#गुरु गीता#स्कंद पुराण#गुरुर्ब्रह्मा
नमः शिवाय मंत्र परिचय

स्कंद पुराण में नमः शिवाय के बारे में क्या कहा गया है?

स्कंद पुराण कहता है: जिसके हृदय में 'नमः शिवाय' मंत्र निवास करता है, उसे अन्य मंत्रों, तीर्थों, तपस्याओं या यज्ञों की कोई आवश्यकता नहीं।

#स्कंद पुराण#नमः शिवाय#तीर्थ तपस्या
शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति

स्कंद पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?

स्कंद पुराण कहता है कि हजार करोड़ शिवलिंगों की पूजा का अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

#स्कंद पुराण#दर्शन मात्र#हजार करोड़
पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य

पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से क्या होता है?

स्कंद पुराण के अनुसार, हजार करोड़ शिवलिंगों के पूजन से जो फल मिलता है, वही अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

#दर्शन मात्र फल#स्कंद पुराण#हजार करोड़ शिवलिंग
विशेष अभिषेक द्रव्य और उनके फल

तीर्थ जल से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है?

स्कंद पुराण के अनुसार, तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति और सभी पापों का क्षय होता है — यह परम आध्यात्मिक लक्ष्य के लिए सर्वश्रेष्ठ द्रव्य है।

#तीर्थ जल#मोक्ष प्राप्ति#पाप क्षय
गौरी-शंकर तत्व और साधना का आधार

गौरी-शंकर साधना किन ग्रंथों पर आधारित है?

गौरी-शंकर साधना शिवपुराण, स्कंदपुराण, देवीभागवत, कौमार तांत्र, आगमिक ग्रंथों, रामचरितमानस और शाक्त आगम पर आधारित है।

#शास्त्रीय आधार#शिवपुराण#स्कंदपुराण
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

पार्वती ने महादेव से क्या इच्छा प्रकट की थी?

पार्वती ने महादेव से 'अंग से अंग' मिलाकर हमेशा के लिए साथ रहने की इच्छा प्रकट की थी, जिससे अर्धनारीश्वर स्वरूप का प्राकट्य हुआ।

#पार्वती#महादेव#भक्ति
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य

स्कंदपुराण में अर्धनारीश्वर रूप कैसे प्रकट हुआ?

स्कंदपुराण के अनुसार, पार्वती ने शिव से 'अंग से अंग' मिलाकर रहने की इच्छा प्रकट की — उनकी इस परम भक्ति और प्रेम से अर्धनारीश्वर रूप का प्राकट्य हुआ।

#स्कंदपुराण#अर्धनारीश्वर#पार्वती
श्री रुद्र-कवच-संहिता

श्री रुद्र कवच किस महापुराण से प्राप्त होता है?

श्री रुद्र कवच स्कन्द महापुराण से लिया गया एक अत्यंत प्रामाणिक और पवित्र स्तोत्र है।

#रुद्र कवच#स्कन्दपुराण#प्रामाणिकता
नियम निषेध

क्या चढ़ाया हुआ बेलपत्र धोकर दोबारा चढ़ा सकते हैं?

हाँ, स्कंदपुराण के अनुसार चढ़ाया हुआ बेलपत्र धोकर दोबारा चढ़ाया जा सकता है। यह 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता।

#पुनर्र्पण#स्कंदपुराण#शुद्धता
प्रतीकात्मक रहस्य

बेलपत्र के पेड़ में किन देवी-देवताओं का वास होता है?

बेल के पेड़ में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और माता पार्वती के विभिन्न स्वरूपों (जैसे गिरिजा, महेश्वरी, गौरी) सहित सभी तीर्थों का वास होता है।

#बिल्व वृक्ष#देवताओं का वास#स्कंदपुराण
स्तोत्र पाठ

प्रदोष स्तोत्राष्टकम् क्या है?

यह स्कंद पुराण में लिखा एक खास पाठ है, जिसका अर्थ है कि इस जन्म और मरण के भयंकर संसार में केवल शिव जी के चरणों की सेवा ही एकमात्र सत्य है।

#स्कंद पुराण#स्तोत्राष्टकम्#शिव महिमा
मंत्र और स्तोत्र

सत्यनारायण भगवान का ध्यान मंत्र क्या है?

ध्यान मंत्र है: "ध्यायेत् सत्यं गुणातीतं गुणत्रय-समन्वितम्... नीलवर्णं पीतवस्त्रं..." (अर्थात जो सत्य स्वरूप हैं, तीनों गुणों से परे हैं, नीले रंग और पीले वस्त्रों वाले हैं, उनका मैं ध्यान करता हूँ)।

#ध्यान मंत्र#स्कंद पुराण#भगवान का स्वरूप
शास्त्रीय प्रमाण

सत्यनारायण व्रत का उल्लेख किस पुराण में मिलता है?

इस व्रत का मुख्य उल्लेख 'स्कंद पुराण' के 'रेवा खंड' और 'भविष्य पुराण' के 'प्रतिसर्ग पर्व' में मिलता है, जहाँ भगवान विष्णु स्वयं देवर्षि नारद को इस व्रत की महिमा बताते हैं।

#स्कंद पुराण#रेवा खंड#भविष्य पुराण
शास्त्रीय प्रमाण

क्या शनिवार व्रत का वर्णन पुराणों और शास्त्रों में है?

हाँ, इसका वर्णन स्कंद पुराण, पद्म पुराण, भविष्य पुराण, धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में मिलता है।

#शास्त्र प्रमाण#स्कंद पुराण#दशरथ स्तोत्र
उपासना का फल

स्कंद पुराण के अनुसार कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की पूजा से गर्भ-वास (पुनर्जन्म) से मुक्ति कैसे मिलती है?

यह लिंग अण्डाकार है जो सृष्टि के मूल का प्रतीक है। इसकी पूजा से साधक जन्म के रहस्य को जानकर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है और उसे पुनः गर्भ-वास (जन्म) का कष्ट नहीं सहना पड़ता।

#पुनर्जन्म मुक्ति#गर्भ-वास मुक्ति#सायुज्य मोक्ष
काशी के शिवलिंग

काशी में कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की थी?

इसकी स्थापना भगवान शिव के प्रिय 'कुक्कुट' नामक शिव गण ने की थी। इसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में मिलता है, जहाँ कुक्कुट गण काशी की दिव्यता से मोहित होकर यहीं बस गए और शिवलिंग स्थापित किया।

#कुक्कुटेश्वर शिवलिंग#शिव गण कुक्कुट#स्कंद पुराण
उपासना का फल

स्कंद पुराण के अनुसार पिंगलेश्वर शिवलिंग की पूजा और दान के क्या फायदे (फल) हैं?

यहाँ दर्शन से जन्म-जन्मांतर के पाप भस्म होते हैं और पितरों को प्रेत-योनि से मुक्ति मिलती है। यह तारक ज्ञान प्रदान कर जीव को आवागमन के चक्र से मुक्त करता है और शिव-सायुज्य (मोक्ष) देता है।

#मोक्ष प्राप्ति#पाप क्षय#पितृ शांति
काशी के शिवलिंग

काशी में पिंगलेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?

इसकी स्थापना साक्षात् शिव के अत्यंत तेजस्वी अनुचर 'पिंगल गण' ने की थी। इसका ऐतिहासिक प्रमाण स्कंद पुराण के काशी खंड में मिलता है।

#पिंगलेश्वर शिवलिंग#शिव गण पिंगल#स्कंद पुराण
पौराणिक कथाएँ

भगवान शिव ने अपने गणों को काशी क्यों भेजा था?

राजा दिवोदास के निष्कंटक शासन में दोष निकालने और उन्हें काशी से विस्थापित करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को काशी भेजा था, ताकि शिव पुनः अपनी प्रिय नगरी लौट सकें।

#राजा दिवोदास#शिवगणों का काशी आगमन#स्कंद पुराण
काशी के शिवलिंग

काशी में नंदीशेनेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?

इस शिवलिंग की स्थापना शिव के पराक्रमी गण 'नंदीषेण' ने की थी, जिसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53-54) में प्राप्त होता है।

#नंदीशेनेश्वर शिवलिंग#शिवगण नंदीषेण#स्कंद पुराण
उपासना का फल

स्कंद पुराण के अनुसार नंदीवन स्थित सोमानंदीश्वर लिंग के दर्शन और आराधना का क्या फल प्राप्त होता है?

स्कंद पुराण के अनुसार इसके दर्शन और आराधना से 'सौ गायों के दान' (शत-गोदान) के समान पुण्य प्राप्त होता है। साधक लौकिक सुख भोगकर अंततः सोमलोक (चंद्रलोक) के सर्वोच्च आनंद को प्राप्त करता है।

#सोमलोक की प्राप्ति#उपासना का फल#शत गोदान
तुलनात्मक अध्ययन

काशी में स्थित सोमानंदीश्वर लिंग, चंद्रेश्वर लिंग और सोमेश्वर लिंग में क्या मुख्य अंतर है?

सोमेश्वर लिंग गुजरात के सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग प्रतिरूप है; चंद्रेश्वर लिंग चंद्रदेव द्वारा स्थापित है जो समृद्धि देता है; जबकि सोमानंदीश्वर लिंग शिवगण सोमनंदी द्वारा स्थापित एक 'तपस्या-स्थल' है जो अवसाद और क्रोध दूर करता है।

#सोमानंदीश्वर बनाम चंद्रेश्वर#सोमेश्वर लिंग#काशी के शिवलिंग
काशी के शिवलिंग

काशी के नंदीवन में सोमानंदीश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की और इसका प्रामाणिक उल्लेख किस पुराण में है?

इसकी स्थापना भगवान शिव के उग्र गण 'सोमनंदी' ने की थी। इसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में प्राप्त होता है, जब शिव ने गणों को राजा दिवोदास की परीक्षा लेने काशी भेजा था।

#सोमानंदीश्वर शिवलिंग#शिव गण सोमनंदी#स्कंद पुराण
उपासना का फल

स्कंद पुराण के अनुसार महोदरेश्वर शिवलिंग के दर्शन और साधना का अंतिम फल (मोक्ष) क्या है?

स्कंद पुराण (काशी खण्ड) के अनुसार जो साधक महोदरेश्वर के दर्शन और साधना करता है, वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है और उसे पुनः किसी माता के गर्भ में प्रवेश नहीं करना पड़ता (सायुज्य मुक्ति)।

#मोक्ष प्राप्ति#स्कंद पुराण फल-श्रुति#सायुज्य मुक्ति
सभी ग्रन्थ
अन्य ग्रन्थ देखें

रामायण, महाभारत, गीता, पुराण, वेद, उपनिषद — सभी ग्रन्थों की सूची।

टैग खोज
विषय अनुसार खोजें

गरुड़ पुराण, बालकाण्ड, मंत्र, साधना — टैग द्वारा प्रश्न खोजें।