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विस्तृत उत्तर
स्कन्द पुराण के अनुसार हाटकेश्वर शिवलिंग और पाताल लोक के नीचे अथाह जलराशि है, और उस जलराशि के नीचे घोर नरक स्थित हैं। इन नरकों में रौरव आदि नरकों का उल्लेख है, जिनकी संख्या पचपन करोड़ बताई गई है। यह विवरण स्पष्ट करता है कि वितल लोक और अन्य बिल-स्वर्ग भोग-विलास के स्थान हैं, पर यदि कोई आत्मा यहाँ रहकर भी पाप कर्मों में लिप्त होती है, तो उसे इन अधोलोकों के नीचे स्थित नरकों में जाना पड़ता है।
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