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षट्कर्म से जुड़े सभी प्रश्न(12)

षट्कर्म पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 12 प्रश्न उपलब्ध हैं।

तंत्र षट्कर्म

तंत्र में आकर्षण कर्म कैसे किया जाता है?

'आकर्षित करना' — राजसिक। सात्विक: व्यक्तित्व, अवसर, ईश्वर आकर्षण ('क्लीं')। अनुचित: बलपूर्वक = पाप। 'ॐ क्लीं कृष्णाय नमः' = सात्विक। विधि विवरण अनुचित।

#आकर्षण#कर्म#कैसे
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में विद्वेषण कर्म का क्या उद्देश्य होता है?

'भेद/विभाजन' — दो में शत्रुता। तामसिक (निकृष्ट)। गंभीर कर्म बंधन। सात्विक: स्वयं का बुराई से अलग = वैराग्य। सामान्य: पूर्णतः वर्जित। केवल शांति = उचित।

#विद्वेषण#कर्म#उद्देश्य
तंत्र साधना

तंत्र में शांति कर्म सबसे सात्विक क्यों माना जाता है?

षट्कर्म: शांति(सात्विक)→वशीकरण→स्तंभन(राजसिक)→विद्वेषण→उच्चाटन→मारण(तामसिक)। शांति = कल्याण, निःस्वार्थ, पुण्य। सामान्य = केवल शांति। शेष = तांत्रिक/गुरु।

#शांति कर्म#सात्विक#षट्कर्म
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में मारण कर्म क्या है और इसका दुष्प्रभाव क्या होता है?

सर्वनिकृष्ट + सर्ववर्जित। दुष्प्रभाव: गंभीर कर्म बंधन, प्रतिघात (परिवार कष्ट), पागलपन, साधना पतन, IPC 302/307 (कानूनी अपराध)। 'जो मारे = वो मरे।' शांति = एकमात्र धर्म। विधि कभी न दें।

#मारण#कर्म#क्या
षट्कर्म और तांत्रिक बाधा

स्तोत्र में किन षट्कर्मों का उल्लेख है?

स्तोत्र में स्तम्भन, मोहन, वश्याकर्षण, उच्चाटन, कीलन और द्वेषण — इन छह षट्कर्मों का उल्लेख है जिन्हें स्तोत्र 'दह छिंदी छिंदी' से ध्वस्त करता है।

#षट्कर्म#स्तम्भन#उच्चाटन
षट्कर्म और तांत्रिक बाधा

षट्कर्म क्या होते हैं?

षट्कर्म तंत्र के छह प्रमुख कर्म हैं: स्तम्भन, मोहन, वश्याकर्षण, उच्चाटन, कीलन और द्वेषण। नीलकंठ स्तोत्र इन कर्मों के दुष्प्रभाव से रक्षा करता है।

#षट्कर्म#छह कर्म#तांत्रिक
तंत्र ज्ञान

वशीकरण मंत्र क्या है?

वशीकरण तंत्र के षट्कर्म में आता है — किंतु कुलार्णव तंत्र स्पष्ट कहता है: 'दूसरे की इच्छा के विरुद्ध वश करना पाप है।' शास्त्र का मत है कि षट्कर्म में केवल 'शांति' (रोग-बाधा निवारण) सात्विक और उचित है। सच्ची साधना आत्मोद्धार के लिए है, दूसरों के शोषण के लिए नहीं।

#वशीकरण#षट्कर्म#शास्त्र मत
तंत्र ज्ञान

वशीकरण मंत्र क्या है?

वशीकरण तंत्र के षट्कर्मों में से एक है — किंतु कुलार्णव तंत्र की स्पष्ट चेतावनी है कि दूसरों को वश में करने की चेष्टा साधक को स्वयं हानि पहुँचाती है। श्रेष्ठ वशीकरण है — आत्म-वशीकरण: अपने मन और इंद्रियों को वश में करना। किसी की स्वतंत्र इच्छा का हरण पाप है।

#वशीकरण#षट्कर्म#तंत्र कर्म
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में स्तंभन कर्म किस परिस्थिति में किया जाता है?

'रोकना' — शत्रु गति/वाक्/क्रिया। कोर्ट/विवाद, रोग प्रगति। राजसिक। बगलामुखी = स्तंभन देवी ('ह्लीं')। सामान्य: बगलामुखी जप मान्य। षट्कर्म = गुरु। संवेदनशील।

#स्तंभन#कर्म#परिस्थिति
तंत्र शास्त्र

तंत्र में षट्कर्म शांति वशीकरण स्तंभन विद्वेषण उच्चाटन मारण क्या हैं?

6 कर्म: शांति (सात्विक✅), वशीकरण (राजसिक), स्तंभन (राजसिक), विद्वेषण (तामसिक❌), उच्चाटन (तामसिक❌), मारण (महातामसिक❌❌)। शांति = एकमात्र शुभ। शेष = कर्म बंधन/पाप। मारण/विद्वेषण/उच्चाटन = महापाप।

#षट्कर्म#शांति#वशीकरण
तंत्र षट्कर्म

तंत्र में उच्चाटन कर्म का प्रभाव कैसे काम करता है?

'उखाड़ना/हटाना' — स्थान/पद/मोह से। तामसिक (कर्म फल)। सात्विक: स्वयं की बुराई हटाना। सामान्य = केवल शांति कर्म। उच्चाटन = गुरु दीक्षित, कर्म बंधन, वर्जित। विधि गोपनीय।

#उच्चाटन#कर्म#प्रभाव
तंत्र एवं साधना

मारण मंत्र की सच्चाई क्या है?

मारण मंत्र तंत्र के षट्कर्मों में से एक है — जिसका उद्देश्य शत्रु को हानि पहुँचाना बताया जाता था। इसका कोई प्रमाणित वैज्ञानिक आधार नहीं है। शास्त्रों में अन्य की हानि के लिए मंत्र-प्रयोग को पाप माना गया है और धर्मशास्त्र किसी के प्राण लेने का अधिकार किसी मनुष्य को नहीं देते। इसे किसी भी दृष्टि से अनुकरणीय नहीं माना जाना चाहिए।

#मारण मंत्र#तांत्रिक मंत्र#मारण क्रिया
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