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क्या है

धर्मराज क्या है?(11)

धर्मराज का अर्थधर्मराज क्या है?धर्मराज का महत्व
सरल उत्तर

यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।

स्रोत प्रश्न: यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं? →
महाभारत

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद क्या है?

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद वनपर्व का एक दार्शनिक प्रसंग है जिसमें यक्ष ने युधिष्ठिर से जीवन, धर्म और आश्चर्य पर प्रश्न पूछे। युधिष्ठिर ने सभी उत्तर दिए और चारों मूर्छित भाइयों को जीवित कराया। वह यक्ष वास्तव में यमराज थे।

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दिव्यास्त्र

यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं?

यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।

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लोक

यमराज कौन हैं?

यमराज मृत्यु के देवता, धर्मराज, पितरों के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के सर्वोच्च अधिकारी हैं।

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लोक

यमलोक का मुख्य उद्देश्य क्या है?

यमलोक का उद्देश्य हर जीव के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करके उसके अनुसार न्याय और दंड या फल देना है।

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लोक

यमलोक क्या है?

यमलोक वह पारलौकिक न्याय-स्थान है जहाँ मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है और उनके अनुसार फल दिया जाता है।

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जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज द्वारा दंड देने का क्रम क्या है?

धर्मराज का दंड-क्रम है — यमलोक पेशी → चित्रगुप्त लेखा → निर्णय → यममार्ग की यातना → वैतरणी → नरक में वास्तविक दंड → पाप-दंड पूरा होने पर पुनर्जन्म।

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जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज के सामने प्रस्तुत करने की प्रक्रिया क्या है?

धर्मराज के समक्ष जीव को यमलोक के द्वार से लाया जाता है। चित्रगुप्त कर्मों का लेखा प्रस्तुत करते हैं, जीव से पूछताछ होती है, पाप-पुण्य की तुलना की जाती है और यमराज निर्णय सुनाते हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज का कार्य क्या है?

धर्मराज यमदूत भेजते हैं, चित्रगुप्त के लेखे से कर्म-न्याय करते हैं और जीव को स्वर्ग-नरक-पुनर्जन्म का निर्णय देते हैं। उनका न्याय पूर्णतः निष्पक्ष और अटल है। यमलोक की समस्त व्यवस्था उनके अधीन है।

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जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज कौन हैं?

धर्मराज यमराज का दूसरा नाम है — धर्म और सत्य के राजा। वे भगवान सूर्य के पुत्र हैं, वाहन भैंसा और हाथ में दंड-पाश हैं। वे समस्त प्राणियों के कर्मों का न्याय करते हैं और स्वर्ग-नरक का निर्णय देते हैं।

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महाभारत

विदुर कौन थे महाभारत में?

विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री, धृतराष्ट्र और पांडु के भाई तथा यमराज के अवतार माने जाते हैं। दासी-पुत्र होने के बावजूद वे अपने नैतिक बल, ज्ञान और सत्यनिष्ठा से महाभारत के सबसे आदरणीय पात्र बने। उन्होंने सदैव धर्म और पांडवों का साथ दिया।

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आत्मा और मोक्ष

यमलोक क्या है और वहाँ क्या होता है

यमलोक = धर्मराज यम का न्यायालय। मृत्यु बाद यमदूत आत्मा को ले जाते हैं → चित्रगुप्त कर्म लेखा प्रस्तुत → यम कर्मानुसार न्याय (स्वर्ग/नरक/पुनर्जन्म)। भगवत्भक्त यमलोक नहीं जाते (भागवत 6.3 — अजामिल कथा)।

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