विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में धर्मराज (यमराज) के समक्ष जीव की प्रस्तुति की प्रक्रिया एक व्यवस्थित न्याय-प्रणाली की तरह वर्णित है।
यमलोक में प्रवेश — जीव वैतरणी नदी पार करने के बाद यमलोक के उपयुक्त द्वार से प्रवेश करता है। द्वारपाल 'धर्मध्वज' उसे अंदर लाते हैं।
चित्रगुप्त का लेखा-प्रस्तुति — यमराज के सामने चित्रगुप्त जीव के समस्त जीवन के कर्मों का विवरण प्रस्तुत करते हैं — पाप और पुण्य दोनों। यह प्रस्तुति एक वकील की भूमिका की तरह है — तथ्यपरक और निष्पक्ष।
जीव से पूछताछ — यमराज स्वयं जीव से पूछते हैं। यदि जीव बहाने बनाए या इनकार करे, तो चित्रगुप्त कर्मों का दृश्य-प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
कर्म-तुलना — गरुड़ पुराण में बताया गया है — 'यमराज उस जीव के पाप-पुण्य की तुलना करते हैं।' यदि पुण्य अधिक हो तो स्वर्ग, पाप अधिक हो तो नरक, और जो पुनर्जन्म के योग्य हों उनके लिए मृत्युलोक।
निर्णय की घोषणा — यमराज अपना निर्णय सुनाते हैं और उनकी आज्ञा से यमदूत जीव को उसके गंतव्य तक ले जाते हैं।





