📖
विस्तृत उत्तर
अहंकार तत्त्व वह अवस्था है जहाँ एकत्व में अलग-अलग पहचान का अनुभव शुरू होता है। सृष्टि के लिए केवल एक अव्यक्त आधार पर्याप्त नहीं, बल्कि नाम, रूप और भेद भी आवश्यक हैं। जब 'मैं' और 'दूसरा' जैसी पहचान बनती है, तब जगत की विविधता संभव होती है। इस कथा में अहंकार तत्त्व को सृष्टि के द्वैत और रूप-विभाजन से जोड़ा गया है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





