विस्तृत उत्तर
अर्धनारीश्वर स्तोत्र का सबसे महत्वपूर्ण फल दांपत्य जीवन में सौहार्द और संतुलन की स्थापना है।
स्तोत्र पाठ करने से साधक स्वयं में और अपने साथी में मौजूद पुरुष (स्थिरता, तर्क) और प्रकृति (भावनात्मकता, गतिशीलता) की ऊर्जाओं को समझ पाता है।
यह आपसी संबंधों में द्वैत (टकराव) को कम करता है और प्रेम को मजबूत करता है, जिससे रिश्तों में सद्भाव आता है।





