विस्तृत उत्तर
भगवान से संवाद — यह मानव का सबसे प्राचीन और स्वाभाविक आध्यात्मिक आवेग है। प्रार्थना वह माध्यम है जिसके द्वारा जीवात्मा परमात्मा से बात करती है।
प्रार्थना के माध्यम से भगवान से संवाद कैसे करें —
स्थान और समय — प्रात:काल ब्रह्म-मुहूर्त में या संध्याकाल में, एकांत में, पूजा स्थल पर या प्रकृति के बीच प्रार्थना करना सबसे प्रभावशाली है।
मन की तैयारी — पहले कुछ श्वास लें, मन को शांत करें। प्रार्थना के पहले 'ॐ' का उच्चारण या नाम-जप करें ताकि मन विषयों से हटे।
सच्चा भाव — भगवान से वैसे बात करें जैसे अपने परम प्रिय से करते हैं — खुलकर, बिना दिखावे के। 'हे प्रभु, मुझे यह कठिनाई है, आप ही रास्ता दिखाएं।'
शब्दों से परे — प्रार्थना केवल शब्दों की नहीं होती। जब आँखें भर आएं, जब हृदय भर जाए — यह मौन प्रार्थना भी उतनी ही शक्तिशाली है।
कृतज्ञता — प्रत्येक प्रार्थना में भगवान के प्रति कृतज्ञता अवश्य व्यक्त करें। 'आपने जो दिया है, वह पर्याप्त है।'
सुनने की तैयारी — प्रार्थना एकतरफा नहीं होनी चाहिए। बोलने के बाद कुछ क्षण मौन में बैठें — भगवान का उत्तर प्रतीक्षा करें। यह उत्तर सीधे मन में आने वाले विचार, भाव या संकेत के रूप में आता है।





