विस्तृत उत्तर
भगवान शिव ने अर्जुन की तपस्या से प्रसन्न होने से पहले उनकी परीक्षा ली। उन्होंने एक किरात (शिकारी) का वेश धारण किया और अर्जुन से युद्ध किया। अर्जुन ने उस शिकारी के साथ बड़े पराक्रम से युद्ध किया। इस युद्ध में अर्जुन के पराक्रम और उनकी अटूट भक्ति से भगवान शिव अत्यंत संतुष्ट हुए। इस परीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अर्जुन वास्तव में पाशुपतास्त्र जैसे महाविनाशक अस्त्र को धारण करने और विवेकपूर्ण रूप से प्रयोग करने की योग्यता रखते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





