विस्तृत उत्तर
भस्म (विभूति) तिलक शैव परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। भस्म से लगाया जाने वाला त्रिपुंड शिव-भक्ति का प्रमुख प्रतीक है।
भस्म क्या है — यज्ञ या हवन की पवित्र राख विभूति कहलाती है। शिव पुराण के अनुसार भस्म शिव का प्रसाद है। वे स्वयं भस्म धारण करते हैं क्योंकि यह सांसारिक माया की क्षणभंगुरता और ब्रह्म की नित्यता का प्रतीक है।
त्रिपुंड लगाने की विधि — भस्म को हथेली पर लें। मध्यमा (मध्य अंगुली), अनामिका और कनिष्ठा तीनों को मिलाकर माथे पर तीन क्षैतिज (horizontal) समानांतर रेखाएँ खींचें। ये तीन रेखाएँ क्रमशः सत्व-रज-तम, ब्रह्मा-विष्णु-महेश और तीन लोकों का प्रतीक हैं।
भस्म लगाने का मंत्र — 'त्र्यायुषं जमदग्नेः कश्यपस्य त्र्यायुषम्। यद्देवेषु त्र्यायुषं तन्नो अस्तु त्र्यायुषम्॥' यह वैदिक मंत्र है। इसके अतिरिक्त 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए भी भस्म धारण की जा सकती है।
भस्म लगाते समय नियम — भस्म हमेशा माथे पर, हृदय पर, दोनों भुजाओं पर, और नाभि पर लगाई जाती है। शनिवार और महाशिवरात्रि पर भस्म तिलक विशेष रूप से शुभ है।





