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विस्तृत उत्तर
अमृत-कुण्ड प्रसंग में ब्रह्मा जी ने बछड़े का रूप धारण किया। भगवान विष्णु ने गौ का रूप लिया। मय दानव के बनाए अमृत-कुण्ड में मृत दानव जीवित हो जाते थे और अधिक शक्तिशाली बन जाते थे। इस माया को समाप्त करने के लिए विष्णु और ब्रह्मा ने गौ और बछड़े का रूप लेकर उस कुण्ड का सारा अमृत पी लिया।
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