विस्तृत उत्तर
ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा भगवान श्रीकृष्ण की समस्त लीलाभूमि की परिक्रमा है। यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण और विशाल तीर्थ यात्राओं में से एक है जिसका उल्लेख वेद-पुराणों तथा गर्ग संहिता में मिलता है।
84 कोस' पारंपरिक भारतीय दूरी माप है जहाँ एक कोस लगभग 2 से 3 किलोमीटर के बराबर होता है। इस प्रकार यह परिक्रमा लगभग 252 से 360 किलोमीटर की होती है और उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के साथ-साथ राजस्थान के भरतपुर जिले और हरियाणा के कुछ भाग तक फैली हुई है। इस यात्रा में मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगाँव, बरसाना, गोवर्धन सहित 1300 से अधिक स्थान, 1000 से अधिक सरोवर, 48 वन और 24 कदम्ब खंड आते हैं।
गर्ग संहिता में इस परिक्रमा की उत्पत्ति की कथा मिलती है। एक बार जब माता यशोदा और नंद बाबा ने भगवान श्रीकृष्ण से चारों धामों की यात्रा की इच्छा जताई, तब कृष्ण ने उनकी वृद्धावस्था का ध्यान करते हुए सभी तीर्थों और चारों धामों को ब्रज में ही आह्वान कर लिया। तभी से यह परिक्रमा की परंपरा चली आ रही है।
मान्यता है कि 84 कोस की परिक्रमा करने से व्यक्ति 84 लाख योनियों के जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु धरती पर शयन, नित्य स्नान, ब्रह्मचर्य पालन, नंगे पाँव चलना, प्रतिदिन देव पूजा और कीर्तन जैसे नियमों का पालन करते हैं। चातुर्मास में इस परिक्रमा का विशेष महत्व है।





