विस्तृत उत्तर
ध्यान = मोक्ष का सबसे सीधा और प्रभावी मार्ग। ध्यान बिना मोक्ष = असम्भव (अधिकांश दर्शनों में)।
सम्बंध
1. ध्यान → समाधि → मोक्ष: योगसूत्र: ध्यान गहरा → समाधि → असम्प्रज्ञात समाधि → कैवल्य (मोक्ष)। ध्यान = मोक्ष का मार्ग, समाधि = द्वार, मोक्ष = मंजिल।
2. गीता (6.15): 'युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः। शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति।।' — सदा ध्यान करने वाला योगी = निर्वाण (मोक्ष) रूपी परम शान्ति प्राप्त करता है।
3. आत्म-ज्ञान = मोक्ष: विवेकचूड़ामणि: मोक्ष = आत्म-ज्ञान (मैं कौन हूँ?)। ध्यान = वह प्रक्रिया जिससे आत्म-ज्ञान प्रकट। 'मैं शरीर नहीं, मन नहीं, आत्मा हूँ' = ध्यान से प्रत्यक्ष अनुभव।
4. बंधन-मुक्ति: मोक्ष = बंधनों (अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश) से मुक्ति (योगसूत्र 2.3)। ध्यान = इन क्लेशों को जलाने वाली अग्नि।
5. जीवनमुक्ति: मोक्ष = मृत्यु बाद ही नहीं। जीवनमुक्ति = जीवित रहते मोक्ष। ध्यान = जीवनमुक्ति का साधन। शरीर में रहकर बंधन-रहित।
अन्य मार्ग भी: ज्ञान योग (विचार), भक्ति योग (प्रेम), कर्म योग (निष्काम कर्म) = भी मोक्ष मार्ग। परंतु सभी में ध्यान = अन्तर्निहित (सभी अंततः ध्यान में विलीन)।
सार: ध्यान = मोक्ष का Engine। भक्ति/ज्ञान/कर्म = विभिन्न मार्ग (Tracks)। सभी मार्गों पर ध्यान = ईंधन।





