विस्तृत उत्तर
ध्यान से ऊर्जा वृद्धि का कारण प्राण-संरक्षण और मन की एकाग्रता है।
शास्त्रीय आधार
प्रश्नोपनिषद (3.3): 'प्राणो ह पितुः पुत्रं ब्रह्म विचरति।' — प्राण ही जीवन-शक्ति है। ध्यान से प्राण का बिखराव रुकता है।
ऊर्जा वृद्धि के चार कारण
1मन-विक्षेप में कमी
सामान्य मन अनगिनत विचारों में ऊर्जा व्यय करता है। ध्यान में मन एकाग्र होने से यह व्यय रुकता है।
2प्राण-संचय
ध्यान के दौरान श्वास मंद और गहरी होती है → अधिक प्राण संचय। मांडूक्योपनिषद: तुरीय अवस्था में प्राण पूर्णतः स्थिर होता है।
3नाड़ी शुद्धि
शिव संहिता: नियमित ध्यान से 72,000 नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं → ऊर्जा प्रवाह निर्बाध।
4कोर्टिसोल में कमी
आधुनिक विज्ञान भी पुष्टि करता है — ध्यान से तनाव हार्मोन कम → शरीर की मरम्मत बेहतर → अधिक ऊर्जा।





