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विस्तृत उत्तर
दिशाओं की उत्पत्ति तब हुई जब सृष्टि में स्थान, गति और भेद का क्रम शुरू हुआ। महाप्रलय में ऊपर-नीचे, पूर्व-पश्चिम या उत्तर-दक्षिण का कोई अर्थ नहीं था। विष्णु की प्रथम श्वास से देश और काल की व्यवस्था बनी। जब स्थान और गति बने, तभी दिशाओं की पहचान संभव हुई।
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