विस्तृत उत्तर
पूजा/जप स्थल की शुद्धि से साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ता है।
पूजा स्थल शुद्धि विधि
- 1भौतिक सफाई: सबसे पहले पूजा स्थल को झाड़ू-पोछा से अच्छी तरह साफ करें। धूल, मकड़जाल, अशुद्धि दूर करें।
- 1गंगाजल छिड़काव: शुद्ध गंगाजल छिड़कें। गंगाजल न हो तो किसी पवित्र नदी का जल, या शुद्ध जल में तुलसी पत्र और कुश डालकर छिड़कें।
- 1गोमय लेपन (उत्तम): गोबर मिश्रित जल से भूमि लीपना सर्वोत्तम शुद्धि विधि है। यह अत्यंत प्राचीन और प्रभावी है।
- 1धूप-अगरबत्ती: गुग्गुल, लोबान, या कपूर की धूप जलाएँ। धूप का धुआँ वातावरण को शुद्ध करता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है।
- 1शुद्धि मंत्र: 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।' — यह मंत्र बोलते हुए जल छिड़कें (स्वयं पर और स्थल पर)।
- 1शंख जल: शंख में जल भरकर छिड़कने से भी शुद्धि होती है। शंख ध्वनि से भी वातावरण शुद्ध होता है।
- 1कपूर जलाना: कपूर जलाने से वायुमण्डल शुद्ध और सुगंधित होता है।
पूजा स्थल नियम: चमड़े की वस्तुएँ (बेल्ट, बैग) न रखें। अशुद्ध वस्त्र (जूते-चप्पल) दूर रखें। पूजा स्थल पर खाना-पीना न करें। नियमित सफाई करें।





