विस्तृत उत्तर
ओणम केरल का सबसे बड़ा पर्व है जो चिंगम मास (अगस्त-सितम्बर) में 10 दिनों तक मनाया जाता है। मुख्य दिन 'थिरुवोणम' है। यह राजा बलि के स्वागत और भगवान विष्णु के वामन अवतार से सम्बद्ध है।
पौराणिक आधार: भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि माँगी और तीनों लोक नाप लिए। किन्तु बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि प्रतिवर्ष एक बार वे अपनी प्रजा (केरलवासियों) से मिलने आ सकते हैं। ओणम = बलि राजा का आगमन = उनकी प्रजा द्वारा भव्य स्वागत।
ओणम विष्णु पूजा विधि
- 1पूक्कलम (पुष्प रंगोली): घर के आँगन में फूलों से सुन्दर रंगोली (पूक्कलम) बनाएँ। प्रतिदिन नई पंखुड़ियाँ जोड़ें। केन्द्र में त्रिक्काक्करप्पन (वामन) की मूर्ति रखें।
- 1त्रिक्काक्करप्पन पूजा: वामन/विष्णु की मिट्टी या धातु प्रतिमा (पिरामिड आकार) — केरल में 'त्रिक्काक्करप्पन' कहते हैं। इसे पूक्कलम के केन्द्र में स्थापित करें। चन्दन, पुष्प, दीपक से पूजन।
- 1ओणसद्या (भव्य भोज): केले के पत्ते पर 26+ व्यंजनों का शाकाहारी भोज — अवियल, सांभर, पायसम, पचड़ी, ओलन, कालन, एरिशेरी। यह विष्णु/बलि को भोग और प्रसाद दोनों है।
- 1मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।' 'ॐ नमो भगवते वामनाय।'
- 1वामन कथा: भागवत पुराण अष्टम स्कन्ध की वामन-बलि कथा का स्मरण।
- 1अन्य परम्पराएँ: वल्लमकली (नौका दौड़), कथकली नृत्य, पुलिकली (बाघ नृत्य) — सांस्कृतिक उत्सव।
विशेष: ओणम केरल का राजकीय पर्व है — सभी धर्मों के लोग मिलकर मनाते हैं। यह सामाजिक समरसता और राजा बलि की दानवीरता का पर्व है।





