ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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पूजा भजन📜 भागवत पुराण — नवधा भक्ति, नारद भक्ति सूत्र2 मिनट पठन

पूजा के दौरान कौन सा भजन गाना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

भजन: इष्ट देव के अनुसार — विष्णु: 'हरे राम हरे कृष्ण'; शिव: 'ओम नमः शिवाय'; दुर्गा: 'जय अम्बे गौरी'; हनुमान: 'हनुमान चालीसा'। सबके लिए: 'ॐ जय जगदीश हरे' (सर्वदेव आरती)। नारद भक्ति सूत्र: स्वर से अधिक भाव महत्वपूर्ण।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में भजन का महत्व भागवत पुराण और नारद भक्ति सूत्र में वर्णित है:

नवधा भक्ति में कीर्तन

भागवत 7.5.23 — 'कीर्तनं' नवधा भक्ति का द्वितीय अंग। भजन-कीर्तन भक्ति का सर्वसुलभ मार्ग।

इष्ट देव अनुसार भजन

| देवता | भजन |

|-------|------|

| विष्णु/कृष्ण | हरे राम हरे कृष्ण, जय जगदीश हरे |

| शिव | शिव तांडव, ओम नमः शिवाय भजन |

| दुर्गा | जय अम्बे गौरी, दुर्गा चालीसा |

| हनुमान | हनुमान चालीसा |

| गणेश | जय गणेश जय गणेश देवा |

आरती गीत (सबसे महत्वपूर्ण)

  • 'ॐ जय जगदीश हरे' — सर्वदेव
  • देवी आरती
  • भगवान-विशेष आरती

भजन के नियम

नारद भक्ति सूत्र — भजन श्रद्धा और भाव से हो। स्वर और ताल से अधिक भाव महत्वपूर्ण है।

नारद भक्ति सूत्र

नारदस्तु तद्अर्पिताखिलाचारिता तद्विस्मरणे परमव्याकुलतेति।' — जिसके सब कार्य भगवान को अर्पित हों, जो भगवान को भूलने पर व्याकुल हो — वही सच्चा भक्त है।
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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण — नवधा भक्ति, नारद भक्ति सूत्र
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