विस्तृत उत्तर
पूजा में भजन का महत्व भागवत पुराण और नारद भक्ति सूत्र में वर्णित है:
नवधा भक्ति में कीर्तन
भागवत 7.5.23 — 'कीर्तनं' नवधा भक्ति का द्वितीय अंग। भजन-कीर्तन भक्ति का सर्वसुलभ मार्ग।
इष्ट देव अनुसार भजन
| देवता | भजन |
|-------|------|
| विष्णु/कृष्ण | हरे राम हरे कृष्ण, जय जगदीश हरे |
| शिव | शिव तांडव, ओम नमः शिवाय भजन |
| दुर्गा | जय अम्बे गौरी, दुर्गा चालीसा |
| हनुमान | हनुमान चालीसा |
| गणेश | जय गणेश जय गणेश देवा |
आरती गीत (सबसे महत्वपूर्ण)
- ▸'ॐ जय जगदीश हरे' — सर्वदेव
- ▸देवी आरती
- ▸भगवान-विशेष आरती
भजन के नियम
नारद भक्ति सूत्र — भजन श्रद्धा और भाव से हो। स्वर और ताल से अधिक भाव महत्वपूर्ण है।
नारद भक्ति सूत्र
नारदस्तु तद्अर्पिताखिलाचारिता तद्विस्मरणे परमव्याकुलतेति।' — जिसके सब कार्य भगवान को अर्पित हों, जो भगवान को भूलने पर व्याकुल हो — वही सच्चा भक्त है।





