विस्तृत उत्तर
मंत्र जप की विधि मंत्र महोदधि और धर्म सिंधु में वर्णित है:
जप की विधि (क्रमिक)
1आसन
कुश या ऊनी आसन पर बैठें। रीढ़ सीधी।
2माला
रुद्राक्ष, तुलसी या स्फटिक माला।
3हाथ की स्थिति (जप मुद्रा)
- ▸दाहिने हाथ की मध्यमा और अनामिका से माला पकड़ें
- ▸तर्जनी से माला न छुएं
- ▸गोमुखी में माला रखें
4उच्चारण
- ▸वाचिक — मुख से (प्रारंभिक)
- ▸उपांशु — होंठ हिलाएं, आवाज न निकले (मध्यम)
- ▸मानस — मन में (श्रेष्ठ)
5जप करें
- ▸सुमेरु से शुरू करें
- ▸प्रत्येक मनका पर एक मंत्र
- ▸सुमेरु आने पर माला पलटें — सुमेरु न लांघें
6जप के बाद
- ▸माला माथे से लगाएं
- ▸कुछ क्षण मौन में बैठें
मनुस्मृति
वाचिकाद् दशगुणं श्रेष्ठमुपांशु' — वाचिक से 10 गुणा उपांशु, 100 गुणा मानस।





