विस्तृत उत्तर
पूजा में सिल्क (रेशम) के कपड़े पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके पीछे शास्त्रीय, वैज्ञानिक और प्रतीकात्मक तीनों आधार हैं।
शास्त्रीय कारण: शास्त्रों में कौशेय (रेशम) वस्त्र को अत्यंत पवित्र माना गया है। कौशेय को उच्च श्रेणी के पूजा-वस्त्रों में स्थान दिया गया है। यह वस्त्र देवताओं को अर्पित करने योग्य माना जाता है।
वैज्ञानिक कारण: रेशम विद्युत का सुचालक नहीं है — इसलिए पूजा और ध्यान में शरीर में संचित आध्यात्मिक ऊर्जा पृथ्वी में प्रवाहित नहीं होती। यही कारण है कि सिल्क के आसन को भी शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
प्रतीकात्मक कारण: रेशम की चमक और कोमलता भव्यता और पवित्रता का प्रतीक है। यह देवता को उच्च श्रेणी की भेंट का भाव व्यक्त करती है। विशेष अनुष्ठानों, व्रतों और त्योहारों पर सिल्क वस्त्र पहनना परंपरागत रूप से शुभ है।
व्यावहारिक उपयोग: यदि शुद्ध सिल्क उपलब्ध न हो तो मिश्रित रेशमी वस्त्र या साफ सूती भी पर्याप्त है। भाव और शुद्धि सबसे महत्वपूर्ण है।





