विस्तृत उत्तर
सपत्नीक पितृ पूजन का अर्थ है कि पितरों को उनकी पत्नियों सहित पूजा जाए। हिन्दू विवाह परम्परा में विवाहित स्त्री पति के गोत्र और वंश में समाहित मानी जाती है। इसलिए सामान्य पितृ श्राद्ध में पत्नियाँ अपने पतियों के देव-वर्ग, अर्थात वसु-रुद्र-आदित्य, के साथ सपत्नीक रूप में पूजी जाती हैं और उन्हीं देव-वर्गों का भाग प्राप्त करती हैं। इसका अर्थ यह है कि पिता, पितामह और प्रपितामह जैसे पितर अकेले नहीं, बल्कि अपनी पत्नियों सहित पितृ मण्डल में स्मरण और तर्पित किए जाते हैं।
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