विस्तृत उत्तर
शतपथ ब्राह्मण में वैदिक देवमण्डल के ३३ देवों का वर्गीकरण प्राप्त होता है। महर्षि याज्ञवल्क्य के अनुसार इन ३३ देवों में ८ वसु, ११ रुद्र, १२ आदित्य, १ इन्द्र और १ प्रजापति शामिल हैं। यह वर्गीकरण वैदिक देवताओं को ब्रह्माण्डीय कार्यों के अनुसार व्यवस्थित रूप में समझाता है। पितृकर्म के लिए इनमें से प्रथम तीन देव वर्ग—वसु, रुद्र और आदित्य—विशेष रूप से आधार बनाए गए हैं, क्योंकि पिता, पितामह और प्रपितामह को इन्हीं देव रूपों में स्थापित किया जाता है।
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