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याज्ञवल्क्य प्रश्नोत्तरी — 10 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित याज्ञवल्क्य विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 10 प्रश्न

श्राद्ध फल

प्रतिपदा से अष्टमी तक के तिथि-फल क्या हैं?

याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 के अनुसार तिथि-वार काम्य फल हैं — प्रतिपदा को उत्तम कन्या, द्वितीया को सुयोग्य दामाद और पशु-धन, तृतीया को अश्व यानी वाहन, चतुर्थी को क्षुद्र पशु, पञ्चमी को उत्तम पुत्र, षष्ठी को द्यूत यानी क्रीड़ा में विजय, सप्तमी को कृषि में सफलता, और अष्टमी को वाणिज्य यानी व्यापार में लाभ।

तिथि फलप्रतिपदा से अष्टमीकाम्य श्राद्ध
श्राद्ध दर्शन

काम्य कर्म क्या होता है?

काम्य कर्म वह कर्म है जो किसी विशेष इच्छा या कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है। काम का अर्थ है कामना, और काम्य का अर्थ है कामना से सम्बन्धित। श्राद्ध भी एक काम्य कर्म है, क्योंकि याज्ञवल्क्य स्मृति में हर तिथि का अपना विशिष्ट काम्य फल बताया गया है। द्वितीया का काम्य फल कन्यावेदिन यानी सुयोग्य दामाद और पशु-धन की प्राप्ति है।

काम्य कर्मइच्छा पूर्तिद्वितीया फल
श्राद्ध फल

पितर प्रसन्न होकर क्या देते हैं?

पितर प्रसन्न होकर वंशज को आठ अमूल्य संपदाएं प्रदान करते हैं। ये हैं दीर्घ आयु, सुयोग्य संतान, प्रचुर संपत्ति, श्रेष्ठ ज्ञान, मरणोपरांत स्वर्ग, अंतिम मुक्ति, सभी प्रकार के लौकिक सुख, और राज्य-सत्ता। याज्ञवल्क्य स्मृति में इनका विस्तार से वर्णन है। ये संपदाएं अमूल्य हैं, अर्थात् किसी भी मूल्य से नहीं खरीदी जा सकतीं।

पितर प्रसन्नताआठ संपदावंशज आशीर्वाद
श्राद्ध फल

क्या श्राद्ध से लंबी आयु मिलती है?

हाँ, श्राद्ध से लंबी आयु मिलती है। यह श्राद्ध के आठ प्रमुख फलों में से पहला फल है। याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार पितर तृप्त और प्रसन्न होकर मनुष्यों को सबसे पहले दीर्घ आयु प्रदान करते हैं। मार्कण्डेय और विष्णु पुराण भी इसी की पुष्टि करते हैं।

आयुदीर्घ जीवनश्राद्ध फल
लोक

बृहदारण्यक उपनिषद् में याज्ञवल्क्य ने देवों का कौन सा वर्गीकरण दिया?

याज्ञवल्क्य ने 33 देवों को 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, इन्द्र और प्रजापति में वर्गीकृत किया।

बृहदारण्यक उपनिषदयाज्ञवल्क्य33 देव
लोक

शतपथ ब्राह्मण में 33 देवों का वर्गीकरण कैसे है?

शतपथ ब्राह्मण में 33 देवों को 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, इन्द्र और प्रजापति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

शतपथ ब्राह्मण33 देवयाज्ञवल्क्य
सरस्वती कवच और याज्ञवल्क्य स्तोत्र

याज्ञवल्क्य को सरस्वती स्तोत्र की रचना क्यों करनी पड़ी?

याज्ञवल्क्य को गुरु के श्राप से समस्त विद्या-स्मृति-वेदज्ञान खो गया → सूर्य की कठोर तपस्या → सूर्य ने ज्ञान लौटाया और सरस्वती स्तुति का आदेश दिया → स्तोत्र रचा → देवी ने अद्भुत मेधा, स्मृति और शास्त्रार्थ शक्ति दी।

याज्ञवल्क्यगुरु श्रापविद्या खोई
रामचरितमानस — बालकाण्ड

याज्ञवल्क्यजी ने भरद्वाजजी को वही कथा सुनाई जो किसने किसको सुनाई थी?

वही कथा जो भगवान शिवजी ने माता पार्वतीजी को सुनाई थी। कथा-परम्परा: शिवजी → पार्वतीजी → अगस्त्यजी → याज्ञवल्क्यजी → भरद्वाजजी। इसीलिये मानस की मूल कथाधारा शिव-पार्वती संवाद है।

बालकाण्डकथा परम्पराशिव-पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्ड

मुनि भरद्वाज ने याज्ञवल्क्यजी से क्या प्रश्न किया?

भरद्वाजजी ने पूछा — 'राम कौन हैं? वे अवधेश दशरथ के कुमार जिन्होंने सीता विरह में दुख उठाया और रावण को मारा — वही राम हैं या कोई और परब्रह्म जिनको शिवजी जपते हैं? कृपया विचारकर बताइये।'

बालकाण्डभरद्वाज प्रश्नराम कौन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस में याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद कहाँ हुआ?

तीर्थराज प्रयाग (प्रयागराज) में, भरद्वाजजी के आश्रम में। माघ मेले के अवसर पर मुनि एकत्र होते थे — एक बार स्नान के बाद भरद्वाजजी ने याज्ञवल्क्यजी को रोककर रामकथा सुनने की प्रार्थना की।

बालकाण्डयाज्ञवल्क्यभरद्वाज

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।