विस्तृत उत्तर
याज्ञवल्क्यजी ने भरद्वाजजी को वही कथा सुनाई जो भगवान शिवजी ने माता पार्वतीजी को सुनाई थी।
बालकाण्ड में याज्ञवल्क्यजी बताते हैं कि पहले यह कथा मुनिवर अगस्त्यजीने उन्हें विस्तारसे सुनाई थी, जिसको सुनकर महेश्वरने परम सुख माना। फिर एक ऋषिने शिवजीसे सुन्दर हरिभक्ति पूछी और शिवजीने उनको अधिकारी पाकर रहस्यसहित भक्तिका निरूपण किया।
इस प्रकार कथा-परम्परा है:
- 1मूल कथा शिवजी ने पार्वतीजी को सुनाई
- 2वही कथा अगस्त्यजी को किसी और माध्यम से प्राप्त हुई
- 3अगस्त्यजी ने याज्ञवल्क्यजी को सुनाई
- 4याज्ञवल्क्यजी ने भरद्वाजजी को सुनाई
इसीलिये रामचरितमानस की मूल कथाधारा शिव-पार्वती संवाद है।





