विस्तृत उत्तर
देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक बार महान वैदिक महर्षि याज्ञवल्क्य ने अपने गुरु के श्राप के कारण अपनी समस्त विद्या, स्मृति (Memory) और वेद ज्ञान खो दिया था। अत्यंत दुखी होकर वे भगवान सूर्य की शरण में गए और कठोर तपस्या की।
सूर्य देव ने प्रसन्न होकर उन्हें सभी वेदों और वेदांगों का ज्ञान पुनः प्रदान किया और कहा, 'हे पुत्र! अब तुम अपनी खोई हुई स्मृति और मेधा को स्थायी बनाने के लिए देवी सरस्वती की स्तुति करो।'
सूर्य देव के अंतर्धान होने के बाद, याज्ञवल्क्य ने स्नान कर वाग्देवी की जो हृदयस्पर्शी स्तुति की, वही यह स्तोत्र है।
इस स्तुति से प्रसन्न होकर देवी ने याज्ञवल्क्य को अद्भुत मेधा, स्मृति और शास्त्रार्थ की अजेय शक्ति प्रदान की।





