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सरस्वती कवच और याज्ञवल्क्य स्तोत्र⏱ 2 मिनट पठन

'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' श्लोक का क्या अर्थ है?

संक्षिप्त उत्तर

अर्थ: जो कुंद-चंद्र-तुषार-मोतियों जैसी श्वेत, शुभ्र वस्त्र धारण किए, हाथों में वीणा और वरमुद्रा, श्वेत कमलासना, ब्रह्मा-विष्णु-शिव द्वारा सदा पूजिता — वे भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें और संपूर्ण जड़ता-अज्ञान का नाश करें।

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विस्तृत उत्तर

यह स्तोत्र सनातन परंपरा में विद्या प्राप्ति का सबसे अचूक साधन माना गया है और भारतवर्ष के हर गुरुकुल, विद्यालय और शिक्षण संस्थान में सरस्वती वंदना के रूप में गाया जाता है:

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वति भगवती निःशेषजाड्यापहा॥'

विस्तृत भावार्थ:

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला: जो कुंद के खिले हुए श्वेत फूल (Jasmine), चंद्रमा (Indu) की शीतलता, तुषार (Snow) की उज्ज्वलता और मोतियों के हार के समान धवल (श्वेत) हैं।

या शुभ्रवस्त्रावृता: जिन्होंने पूर्णतः शुभ्र (सफेद) वस्त्र धारण किए हुए हैं।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा: जिनके हाथों (करा) में श्रेष्ठ वीणा सुशोभित है और जो वरमुद्रा धारण किए हुए हैं।

या श्वेतपद्मासना: जो श्वेत कमल के आसन पर विराजमान हैं।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता: जिनकी वंदना और पूजा स्वयं भगवान ब्रह्मा, अच्युत (भगवान विष्णु) और शंकर (भगवान शिव) तथा अन्य देवगण सदैव (सदा) करते हैं।

सा मां पातु सरस्वति भगवती निःशेषजाड्यापहा: वे भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें (पातु) और मेरी संपूर्ण (निःशेष) जड़ता, मूर्खता और अज्ञान (जाड्य) का पूर्णतः नाश (अपहा) करें।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' श्लोक का क्या अर्थ है को संदर्भ सहित समझें

'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला' श्लोक का क्या अर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: अर्थ: जो कुंद-चंद्र-तुषार-मोतियों जैसी श्वेत, शुभ्र वस्त्र धारण किए, हाथों में वीणा और वरमुद्रा, श्वेत कमलासना, ब्रह्मा-विष्णु-शिव द्वारा सदा पूजिता — वे भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें और...

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सरस्वती कवच और याज्ञवल्क्य स्तोत्र प्रश्नोत्तर
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