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विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार कुश के मूल यानी जड़ में ब्रह्मा, मध्य भाग में भगवान विष्णु और अग्र भाग में भगवान शिव का वास माना गया है। पितरों का वास कुश के मूल भाग में माना गया है। इस त्रिदेवात्मक और पितृ-संबंधित पवित्रता के कारण कुश श्राद्ध और तर्पण का अनिवार्य द्रव्य है।
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