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शिव रूप महिमा⏱ 1 मिनट पठन

शिव के पंचवक्त्र रूप का क्या अर्थ है?

पंचवक्त्र = पाँच मुखों वाले शिव। पाँच मुख — सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान — पाँच दिशाओं और पाँच कृत्यों (सृष्टि-पालन-संहार-तिरोभाव-अनुग्रह) के प्रतीक हैं।

संक्षिप्त उत्तर

पंचवक्त्र = पाँच मुखों वाले शिव। पाँच मुख — सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान — पाँच दिशाओं और पाँच कृत्यों (सृष्टि-पालन-संहार-तिरोभाव-अनुग्रह) के प्रतीक हैं। इन्हीं से ॐकार प्रकट हुआ।

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विस्तृत उत्तर

पंचवक्त्र अर्थात 'पाँच मुखों वाले' — भगवान शिव को 'पंचानन' या 'पंचवक्त्र' भी कहते हैं।

शिव पुराण में स्वयं शिव कहते हैं — 'सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह — ये पाँच कृत्य मेरे पाँचों मुखों द्वारा धारित हैं।'

पाँचों मुखों के नाम और दिशा —

सद्योजात (पश्चिम मुख): श्वेत वर्ण। बालक के समान स्वच्छ, शुद्ध और निर्विकार। सृष्टि का अधिपति।

वामदेव (उत्तर मुख): कृष्ण वर्ण। 'विकारों का नाश करने वाला।'

अघोर (दक्षिण मुख): नील वर्ण। संहार का अधिपति। अग्नि तत्व के स्वामी।

तत्पुरुष (पूर्व मुख): पीत वर्ण। 'अपनी आत्मा में स्थित रहना।'

ईशान (ऊर्ध्व मुख): दुग्ध वर्ण। 'जगत का स्वामी।' मोक्ष (अनुग्रह) का अधिपति।

इन पाँचों मुखों से ओंकार (ॐ) के पाँच तत्व — अकार, उकार, मकार, बिंदु और नाद — प्रकट हुए जिससे 'ॐ नमः शिवाय' पंचाक्षर मंत्र का उद्भव हुआ।

प्रत्येक मुख में तीन-तीन नेत्र हैं — इसीलिए शिव 'त्रिनेत्रधारी' और 'पंचवक्त्र' दोनों हैं।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

शिव के पंचवक्त्र रूप का क्या अर्थ है को संदर्भ सहित समझें

शिव के पंचवक्त्र रूप का क्या अर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: पंचवक्त्र = पाँच मुखों वाले शिव। पाँच मुख — सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान — पाँच दिशाओं और पाँच कृत्यों (सृष्टि-पालन-संहार-तिरोभाव-अनुग्रह) के प्रतीक हैं। इन्हीं से ॐकार प्रकट...

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