विस्तृत उत्तर
नटराज की मूर्ति में प्रत्येक तत्व एक गहरा प्रतीकात्मक अर्थ रखता है।
ऊपरी दायाँ हाथ — डमरू: सृष्टि का प्रतीक। डमरू की आवाज सृजन का नाद है — इससे ही सृष्टि उत्पन्न हुई।
ऊपरी बायाँ हाथ — अग्नि: संहार का प्रतीक। शिव एक हाथ से सृजन करते हैं और दूसरे हाथ से विलय।
निचला दायाँ हाथ — अभय मुद्रा: भय से रक्षा का प्रतीक। यह हाथ कहता है — 'मुझसे मत डरो।'
निचला बायाँ हाथ — उठे पैर की ओर इंगित: मोक्ष का मार्ग दर्शाता है।
उठा हुआ पैर — मोक्ष का द्योतक: जो अज्ञान को कुचलने के बाद आध्यात्मिक मुक्ति प्राप्त करता है।
पैर के नीचे अपस्मार — अज्ञान और अहंकार का प्रतीक: शिव इसे कुचल रहे हैं — अर्थात ज्ञान से अहंकार का नाश होता है।
चारों ओर अग्नि का वलय — सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का प्रतीक।
शरीर पर नाग — कुण्डलिनी शक्ति के द्योतक।
समग्र आकृति — ॐकार स्वरूप: यह दर्शाता है कि ॐ शिव में ही निहित है।
यह मूर्ति धर्म, शास्त्र और कला का अनूठा संगम है।



