विस्तृत उत्तर
रुद्र और शंकर शिव के दो प्रमुख स्वरूप हैं:
| विषय | रुद्र | शंकर |
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| अर्थ | 'रुदं द्रावयति' = दुःख नाशक / रौद्र | 'शं करोति' = कल्याण करने वाला |
| स्वभाव | उग्र, रौद्र, भयंकर | सौम्य, दयालु, भक्तवत्सल |
| वेद | ऋग्वेद/यजुर्वेद — रुद्र सर्वप्रथम | पुराणों में शंकर अधिक प्रचलित |
| कार्य | संहार, विनाश, दंड | कल्याण, वरदान, रक्षा |
| पूजा | रुद्राभिषेक, रुद्राष्टाध्यायी | सामान्य शिव पूजा, आरती |
| भक्त | तपस्वी, साधक, तांत्रिक | सामान्य गृहस्थ भक्त |
| प्रतीक | तीसरा नेत्र खुला, त्रिशूल, अग्नि | चंद्रमा, गंगा, नंदी, पार्वती |
एकता: रुद्र और शंकर = एक ही शिव के दो पक्ष। जैसे एक ही सिक्के के दो पहलू — एक रौद्र (संहार आवश्यक हो तब), दूसरा सौम्य (सामान्यतः)।





