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शिव पूजा📜 शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता), लिंग पुराण, स्कंद पुराण2 मिनट पठन

शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का महत्व क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

दूध चढ़ाने का महत्त्व: दूध = सोम-तत्त्व = चंद्रमा (शिव के मस्तक पर)। लिंग पुराण: 'क्षीराभिषेकेण पुत्रं लभते।' हलाहल-ताप-शमन का प्रतीक। फल: पुत्र-प्राप्ति, दीर्घायु। गाय का कच्चा दूध सर्वश्रेष्ठ। भैंस का दूध वर्जित।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का महत्त्व शिव पुराण और लिंग पुराण में विस्तार से वर्णित है।

शास्त्रीय आधार

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता): दूध = सोम-तत्त्व। शिव के मस्तक पर सोम (चंद्रमा) विराजमान है। दूध = चंद्र-तत्त्व का प्रतीक। शिवलिंग पर दूध अर्पित करना = शिव के सोम-स्वरूप की पूजा।

लिंग पुराण: 'क्षीराभिषेकेण पुत्रं लभते।' — दूध से अभिषेक करने पर पुत्र-प्राप्ति होती है। यह विशेषतः संतानहीन दंपतियों के लिए कहा गया है।

दूध के विशेष गुण

1ताप-शमन

शिव ने हलाहल पिया था जिससे उनका कंठ जल रहा था। दूध = शीतल और पोषणकारी। दूध अर्पण = शिव के ताप को शांत करने का प्रतीक।

2शुद्धता का प्रतीक

आगम शास्त्र: दूध = सात्विक, शुद्ध, जीवनदायी तत्त्व। शिव = शुद्ध चेतना। दूध अर्पण = शुद्ध भाव से पूजा।

3फल-विशेष

  • गाय का कच्चा दूध — पुत्र-प्राप्ति, दीर्घायु
  • बकरी का दूध — ज्वर-निवारण (शिव पुराण में उल्लेख)
  • भैंस का दूध — सामान्यतः वर्जित (तामसिक माना जाता है)

महत्त्वपूर्ण टिप्पणी: दूध हमेशा कच्चा (उबाला हुआ नहीं) और शुद्ध होना चाहिए। गाय का दूध सर्वश्रेष्ठ है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता), लिंग पुराण, स्कंद पुराण
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