विस्तृत उत्तर
सिद्ध, चारण और विद्याधर वे दिव्य प्राणी हैं जो स्वर्लोक के विशिष्ट निवासी हैं। सिद्धगण वे महान आत्माएं हैं जो जन्म से ही अष्ट-सिद्धियों (अणिमा, महिमा, लघिमा आदि) से संपन्न होते हैं और स्वर्ग के ऊपरी आवरण अर्थात भुवर्लोक और स्वर्लोक की सीमा में विचरण करते हैं। चारण वे अर्ध-दैवीय गायक और स्तुति-पाठक हैं जो देवताओं की कीर्ति का गान करते हैं और अंतरिक्ष में विचरण करते हुए भगवान के अवतारों की महिमा का वर्णन करते हैं। विद्याधर ज्ञान और कला के अधिष्ठाता होते हैं जो अत्यंत सुंदर और रहस्यमयी विद्याओं के धारक हैं। ये तीनों समूह सात्त्विक और रजोगुणी स्वभाव के होते हैं और इनका जीवनकाल मनुष्यों की तुलना में अत्यंत दीर्घ होता है। ये सत्ताएं पृथ्वी का स्पर्श नहीं करतीं।
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