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विस्तृत उत्तर
तपोलोक में पहुँचने के पश्चात जीवात्मा को पुनः मृत्युलोक, अर्थात पृथ्वी, पर जन्म लेने की आवश्यकता नहीं होती, जब तक कि वह स्वेच्छा से या किसी विशेष ईश्वरीय विधान से अवतार न ले। वे वहाँ ब्रह्मा की आयु समाप्त होने तक, अर्थात प्राकृत प्रलय तक, रहते हैं और अंततः ब्रह्मा जी के साथ ही परब्रह्म परमात्मा में विलीन होकर आत्यंतिक मोक्ष प्राप्त करते हैं। आत्यन्तिक प्रलय वह अवस्था है जहाँ जीवात्मा सर्वोच्च ज्ञान के माध्यम से परम ब्रह्म में विलीन हो जाती है।
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