विस्तृत उत्तर
तेरहवीं (13वां दिन) = सूतक समाप्ति, शुद्धि, प्रेत का पितरों में विलय।
विधि (सामान्य)
- 1शुद्धि स्नान — सभी परिजन प्रातः स्नान।
- 2गृह शुद्धि — घर साफ, गंगाजल छिड़काव, कपूर/धूप।
- 3हवन — शुद्धि हवन (यदि संभव)।
- 4पिंडदान — प्रेत पिंड को पितृ पिंडों में मिलाना (सपिंडीकरण — 12वें दिन किया जाता है; तेरहवीं = शुद्धि)।
- 5ब्राह्मण भोज — ब्राह्मण/पुरोहित को भोजन + दान।
- 6गरीब भोज — गरीबों/जरूरतमंदों को भोजन।
- 7दान — वस्त्र, अन्न, बर्तन, बिस्तर — मृतक के नाम से।
- 8पगड़ी — मुखिया/ज्येष्ठ पुत्र को पगड़ी पहनाना = अब वह परिवार प्रमुख।
- 9सामान्य जीवन — तेरहवीं के बाद सामान्य दिनचर्या पुनः आरंभ।
ध्यान दें: विस्तृत विधि कुल पुरोहित से कराएं। क्षेत्र/कुल अनुसार भिन्न। एक विद्वान का मत: 'शास्त्रों में तेरहवीं का विधान नहीं — 12 दिन (द्वादशाह) तक ही कर्म है। तेरहवीं = सामाजिक परंपरा।'





