विस्तृत उत्तर
कपाल क्रिया = शव जलते समय सिर (कपाल/खोपड़ी) को डंडे/बांस से तोड़ना + अतिरिक्त घी डालना।
क्यों
- 1शारीरिक कारण — सिर की हड्डियां शरीर में सबसे मजबूत; अन्य अंगों से जल्दी नहीं जलतीं। कपाल तोड़ने + घी डालने से पूर्ण दहन।
- 1आध्यात्मिक कारण — शरीर के 11 द्वार हैं; ब्रह्मरंध्र (सिर का शीर्ष) = मोक्ष द्वार। कपाल तोड़ने से आत्मा ब्रह्मरंध्र से मुक्त होती है = मोक्ष। यदि कपाल अक्षुण्ण रहे तो आत्मा बंधन में रह सकती है (मान्यता)। गीता 8.12-13 में ब्रह्मरंध्र से प्राण निकासी = मोक्ष।
- 1तांत्रिक सुरक्षा — कुछ तांत्रिक श्मशान में अधूरे जले कपाल से तांत्रिक क्रियाएं करते हैं। कपाल पूर्ण नष्ट = तांत्रिक दुरुपयोग से बचाव।
कौन करता है: मुखाग्नि देने वाला (पुत्र/कर्ता)। बांस में लोटा बांधकर घी डालते हैं (कुछ परंपरा)।
कब: शव जलने के लगभग 30-45 मिनट बाद, जब चमड़ी/मांस जल जाए।
स्पष्टीकरण: कपाल क्रिया = अंत्येष्टि का अनिवार्य अंग। बिना कपाल क्रिया अंतिम संस्कार अपूर्ण माना जाता है। (विद्युत शवदाहगृह में यह स्वचालित होता है।)





