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अंत्येष्टि संस्कार📜 गरुड़ पुराण (प्रेतखंड 8), अंत्येष्टि पद्धति2 मिनट पठन

मुखाग्नि कौन देता है और कैसे देते हैं

संक्षिप्त उत्तर

प्राथमिकता: ज्येष्ठ पुत्र → छोटा पुत्र → पौत्र → भाई → सगोत्र → पत्नी/बेटी (गरुड़ पुराण 8)। विधि: मुंडन → स्नान → 3-7 परिक्रमा → घड़ा फोड़ना → मुख पर अग्नि। 'पुत्र' = नरक से तारने वाला।

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विस्तृत उत्तर

मुखाग्नि = शव के मुख पर अग्नि लगाना — दाह संस्कार का सबसे महत्वपूर्ण कर्म।

कौन देता है (गरुड़ पुराण — प्राथमिकता क्रम)

  1. 1ज्येष्ठ पुत्र — प्रथम अधिकार।
  2. 2छोटा पुत्र — ज्येष्ठ अनुपस्थित/असमर्थ हो।
  3. 3पौत्र (पोता) — पुत्र न हो।
  4. 4भाई/भतीजा — पुत्र-पौत्र न हों।
  5. 5सगोत्र संबंधी — उपरोक्त न हों।
  6. 6पत्नी/बेटी/बहन — पुरुष संबंधी न हों (गरुड़ पुराण प्रेतखंड 8 — web-verified)।
  7. 7समाज प्रमुख — कोई संबंधी न हो।

कैसे (विधि)

  1. 1कर्ता (मुखाग्नि देने वाला) सिर मुंडवाता है (कुछ परंपरा)।
  2. 2स्नान करके सफेद/शुद्ध वस्त्र पहने।
  3. 3चिता के 3-7 परिक्रमा (वामावर्त — कुछ परंपरा में दक्षिणावर्त)।
  4. 4कच्चे घड़े में जल लेकर परिक्रमा (कंधे पर) — अंतिम परिक्रमा में घड़ा पीछे फोड़ें (कुछ परंपरा)।
  5. 5अग्नि — जलती लकड़ी/मशाल से शव के मुख पर अग्नि लगाएं।
  6. 6मंत्र — पुरोहित मंत्रोच्चार करता है।

'पुत्र' = 'पु' (नरक) + 'त्र' (तारने वाला) — पुत्र = नरक से तारने वाला। इसीलिए पुत्र को मुखाग्नि प्राथमिकता।

स्पष्टीकरण: विधि क्षेत्र और कुल अनुसार भिन्न — कुल पुरोहित आवश्यक।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण (प्रेतखंड 8), अंत्येष्टि पद्धति
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