विस्तृत उत्तर
मुखाग्नि = शव के मुख पर अग्नि लगाना — दाह संस्कार का सबसे महत्वपूर्ण कर्म।
कौन देता है (गरुड़ पुराण — प्राथमिकता क्रम)
- 1ज्येष्ठ पुत्र — प्रथम अधिकार।
- 2छोटा पुत्र — ज्येष्ठ अनुपस्थित/असमर्थ हो।
- 3पौत्र (पोता) — पुत्र न हो।
- 4भाई/भतीजा — पुत्र-पौत्र न हों।
- 5सगोत्र संबंधी — उपरोक्त न हों।
- 6पत्नी/बेटी/बहन — पुरुष संबंधी न हों (गरुड़ पुराण प्रेतखंड 8 — web-verified)।
- 7समाज प्रमुख — कोई संबंधी न हो।
कैसे (विधि)
- 1कर्ता (मुखाग्नि देने वाला) सिर मुंडवाता है (कुछ परंपरा)।
- 2स्नान करके सफेद/शुद्ध वस्त्र पहने।
- 3चिता के 3-7 परिक्रमा (वामावर्त — कुछ परंपरा में दक्षिणावर्त)।
- 4कच्चे घड़े में जल लेकर परिक्रमा (कंधे पर) — अंतिम परिक्रमा में घड़ा पीछे फोड़ें (कुछ परंपरा)।
- 5अग्नि — जलती लकड़ी/मशाल से शव के मुख पर अग्नि लगाएं।
- 6मंत्र — पुरोहित मंत्रोच्चार करता है।
'पुत्र' = 'पु' (नरक) + 'त्र' (तारने वाला) — पुत्र = नरक से तारने वाला। इसीलिए पुत्र को मुखाग्नि प्राथमिकता।
स्पष्टीकरण: विधि क्षेत्र और कुल अनुसार भिन्न — कुल पुरोहित आवश्यक।





