विस्तृत उत्तर
तिलक हिंदू संस्कृति में व्यक्ति की पहचान, आस्था और संप्रदाय का प्रतीक है। तिलक के प्रकारों को दो आधारों पर समझा जा सकता है — सामग्री के अनुसार और संप्रदाय के अनुसार।
सामग्री के आधार पर मुख्य तिलक इस प्रकार हैं:
चंदन तिलक — सफेद या श्वेत चंदन का तिलक मन को शीतलता, शांति और एकाग्रता देता है। यह विष्णु और शिव दोनों के भक्त लगाते हैं। लाल चंदन (रक्त चंदन) सूर्यदेव और शक्ति उपासना में प्रयुक्त होता है।
कुमकुम तिलक — हल्दी और चूने के मेल से बना कुमकुम तेजस्विता और आज्ञाचक्र की शुद्धि के लिए लगाया जाता है। देवी पूजा में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
रोली तिलक — रोली भी कुमकुम का एक रूप है। शुभ कार्यों, मंगल अवसरों और देवी-वंदना में रोली का तिलक लगाया जाता है।
केसर तिलक — केसर का तिलक सात्विक गुणों को बढ़ाता है और बृहस्पति ग्रह को बलशाली बनाता है। गुरुवार को और विष्णु तथा बृहस्पति पूजन में यह विशेष उपयुक्त है।
भस्म तिलक — विभूति (यज्ञ की भस्म) से बना तिलक शैव भक्त लगाते हैं। यह शनिवार को और भगवान शिव के उपासकों के लिए उत्तम है।
हल्दी तिलक — हल्दी का तिलक मंगलाचरण और गणेश-लक्ष्मी पूजन में प्रयुक्त होता है।
गोपीचंदन तिलक — द्वारका के निकट गोपी सरोवर की मिट्टी से बना यह तिलक वैष्णव भक्त लगाते हैं।
संप्रदाय के आधार पर:
त्रिपुंड — भस्म से बनी तीन क्षैतिज रेखाएँ, शैव परंपरा का प्रतीक। यह अज्ञान, मोह और अहंकार के नाश का प्रतीक है।
ऊर्ध्वपुंड्र — सफेद चंदन की दो ऊर्ध्व रेखाएँ जिनके बीच लाल/पीली रेखा होती है, वैष्णव संप्रदाय का तिलक है जो विष्णु के चरणों का प्रतीक है।
शक्तिपंथ तिलक — लाल कुमकुम या सिंदूर का तिलक जो शाक्त और तांत्रिक परंपरा में प्रचलित है।





