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तंत्र उद्देश्य📜 कुलार्णव तंत्र, तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना का उद्देश्य क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र उद्देश्य: कुलार्णव — 'भुक्ति (भोग) और मुक्ति दोनों।' चतुर्वर्ग: धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। तंत्रालोक: शिव-शक्ति एकता। व्यावहारिक: रोग-बाधा निवारण, शक्ति, शांति। परम: शक्ति से एकता — सिद्धियाँ मंजिल नहीं।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना के उद्देश्य का वर्णन कुलार्णव तंत्र और तंत्रालोक में मिलता है:

कुलार्णव तंत्र

भुक्तिं मुक्तिं च संसिद्ध्यर्थं तंत्रोक्तां साधनां चरेत्।

— भुक्ति (सांसारिक भोग) और मुक्ति (मोक्ष) दोनों के लिए तंत्र साधना करें।

चतुर्वर्ग उद्देश्य

  1. 1धर्म — जीवन में धर्माचरण
  2. 2अर्थ — समृद्धि और सफलता
  3. 3काम — इच्छाओं की पूर्ति
  4. 4मोक्ष — अंतिम मुक्ति

तंत्रालोक (अभिनवगुप्त)

tंत्र का परम उद्देश्य = 'शिव-शक्ति एकता' का अनुभव। 'अहं' (मैं) और 'इदं' (यह) — दोनों का एक होना।

व्यावहारिक उद्देश्य

  • रोग से मुक्ति
  • बाधाओं का निवारण
  • शत्रु से रक्षा
  • मानसिक शांति और बल
  • आध्यात्मिक शक्तियाँ (सिद्धियाँ)

परम उद्देश्य

महानिर्वाण तंत्र: तंत्र का परम उद्देश्य न केवल सिद्धियाँ पाना है — बल्कि 'शक्तिमान से एकता' प्राप्त करना है। सिद्धियाँ मार्ग की झलकियाँ हैं, मंजिल नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
कुलार्णव तंत्र, तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), महानिर्वाण तंत्र
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